ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली-NCR में सर्दियां आते ही प्रदूषण सबसे बड़ी चिंता बन जाता है। इस साल मौसम से जुड़ी एक और स्थिति ने चिंता बढ़ा दी है। प्रशांत महासागर में सक्रिय सुपर अल नीनो का असर नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच ज्यादा रहने की बात सामने आई है। इसी दौरान दिवाली और उत्तर भारत में पराली जलाने का सीजन भी रहता है। ऐसे में हवा की गुणवत्ता पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
सुपर अल नीनो क्या कर सकता है?
अल नीनो एक मौसमी घटना है, जिसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के पैटर्न पर पड़ता है। इस बार इसके मजबूत रूप यानी सुपर अल नीनो की चर्चा है। मौसम में बदलाव का असर बारिश, तापमान और हवा की स्थिति पर पड़ सकता है। भारत में इसका असर मानसून से लेकर सर्दी तक अलग-अलग रूप में दिखाई दे सकता है। प्रदूषण के लिहाज से सबसे बड़ी चिंता तब होती है जब हवा की रफ्तार कम हो और प्रदूषक लंबे समय तक वातावरण में फंसे रहें। दिल्ली जैसे बड़े शहर में वाहनों, निर्माण कार्य, उद्योग और दूसरे स्थानीय स्रोतों के साथ बाहर से आने वाला प्रदूषण भी जुड़ जाता है।
दिवाली और पराली का मेल
दिवाली के आसपास पटाखों से निकलने वाला धुआं पहले से मौजूद प्रदूषण को बढ़ा सकता है। इसके साथ पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ती हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2025 में पंजाब में खेतों में आग लगने के 5,114 मामले दर्ज हुए थे। हरियाणा में 662 और उत्तर प्रदेश में 7,290 मामले सामने आए। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि अलग-अलग राज्यों में पराली जलाने का ट्रेंड एक जैसा नहीं रहा।
दिल्ली की हवा पर कितना असर?
दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण पर पराली का असर हर दिन एक जैसा नहीं रहता। पिछले साल कुछ ही दिनों में खेतों की आग का योगदान 10 फीसदी से ज्यादा रहा था। लेकिन मौसम की परिस्थितियां बदलने पर यही स्रोत ज्यादा असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक सिर्फ पराली जलाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। फसल के अवशेषों का खेत में ही सही इस्तेमाल और दूसरे उपयोगों के लिए उसका प्रबंधन भी जरूरी है।
समाधान पर भी ध्यान जरूरी
प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल मौसम के बदलने से नहीं हो सकता। इसके लिए वाहनों का धुआं, निर्माण की धूल, औद्योगिक प्रदूषण और फसल अवशेष जलाने जैसे अलग-अलग कारणों पर काम करना पड़ता है। विशेषज्ञों ने भी इस बात पर जोर दिया है कि पराली रोकने के लिए नियम लागू करने के साथ किसानों को फसल अवशेषों के प्रबंधन के व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी है। इस साल दिवाली और पराली के मौसम के साथ सुपर अल नीनो की स्थिति किस तरह का असर डालती है, यह आने वाले महीनों में मौसम और हवा की स्थिति पर निर्भर करेगा। फिलहाल दिल्ली-NCR के लिए प्रदूषण को लेकर पहले से तैयारी रखना जरूरी माना जा रहा है।
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