ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में जुटा हुआ है। इसी दिशा में हाल ही में एक ऐसी तकनीक का सफल परीक्षण किया गया है, जिसने रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसका नाम है TARA (Tactical Advanced Range Augmentation)। यह भारत का पहला स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। हाल ही में भारतीय वायुसेना और DRDO ने इसका सफल परीक्षण ओडिशा तट के पास किया।
आखिर क्या है TARA सिस्टम?
TARA कोई पारंपरिक मिसाइल नहीं है। यह एक मॉड्यूलर ग्लाइड बॉम्ब किट है, जिसे सामान्य या अनगाइडेड बमों के साथ जोड़ा जाता है। इस किट के लगने के बाद साधारण बम एक सटीक निशाना लगाने वाले स्मार्ट हथियार में बदल जाता है। इसमें गाइडेंस सिस्टम, कंट्रोल सरफेस और एयरोडायनामिक विंग्स लगाए जाते हैं, जो बम को लक्ष्य तक सटीक रूप से पहुंचाने में मदद करते हैं।
कैसे काम करता है यह हथियार?
जब किसी लड़ाकू विमान से TARA से लैस बम छोड़ा जाता है, तो वह सीधे नीचे गिरने के बजाय हवा में ग्लाइड करता हुआ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है। यह सिस्टम GPS, INS और भारत के NAVIC नेविगेशन नेटवर्क की मदद से लक्ष्य तक पहुंचता है। इससे निशाना लगाने की सटीकता काफी बढ़ जाती है।
चीन और पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है?
TARA की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता है। इसका मतलब है कि भारतीय लड़ाकू विमान दुश्मन के एयर डिफेंस क्षेत्र में प्रवेश किए बिना सुरक्षित दूरी से हमला कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, TARA से लैस बम 80 से 100 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेद सकते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में इसकी रेंज 150 किलोमीटर तक पहुंच सकती है।
यानी भारतीय वायुसेना के विमान जैसे Sukhoi Su-30MKI, HAL Tejas और SEPECAT Jaguar दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम से सुरक्षित दूरी पर रहते हुए भी सटीक हमला कर सकते हैं।
कम लागत में बड़ी ताकत
दुनिया के कई देशों ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जो साधारण बमों को स्मार्ट हथियार में बदल देती है। भारत का TARA सिस्टम भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसकी खास बात यह है कि पूरी नई मिसाइल विकसित करने की तुलना में इसकी लागत कम है, जबकि इसकी मारक क्षमता काफी प्रभावी है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
TARA का विकास भारत की "आत्मनिर्भर भारत" पहल के तहत किया गया है। इसे हैदराबाद स्थित Defence Research and Development Organisation की रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) और अन्य प्रयोगशालाओं ने मिलकर तैयार किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इसके उत्पादन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
भविष्य में क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में सटीक और कम लागत वाले हथियारों की मांग तेजी से बढ़ रही है। TARA जैसे सिस्टम भारतीय वायुसेना को अधिक प्रभावी, सटीक और सुरक्षित हमले करने की क्षमता देंगे। इसके साथ ही भारत की विदेशी हथियारों पर निर्भरता भी कम होगी।
TARA सिस्टम भारत की रक्षा तकनीक में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह साधारण बमों को स्मार्ट हथियारों में बदलकर भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है। इसकी लंबी रेंज, सटीकता और कम लागत इसे आधुनिक युद्ध के लिए बेहद उपयोगी बनाती है। यही कारण है कि भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान भी इस नई तकनीक पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
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