ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश में अभी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन सियासी हलचल कुछ और ही इशारा कर रही है। INDIA ब्लॉक की बैठक, अखिलेश यादव की तैयारियां, भाजपा का बूथ स्तर का काम और जनगणना का स्टाफ ओवरलैप — ये सब मिलकर जल्द चुनाव की सुगबुगाहट बढ़ा रहे हैं।
1. INDIA ब्लॉक की बैठक और अखिलेश की सक्रियता
8 जून को दिल्ली में INDIA गठबंधन की बड़ी बैठक हुई, जिसमें 25 दल शामिल हुए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी इस बैठक में शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वे CJI को SIR (Special Intensive Revision) और चुनाव निष्पक्षता को लेकर पत्र लिखेंगे। इससे पहले 5 जून को राहुल गांधी के साथ यूपी के दलित और अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं की बैठक हुई। इसे सपा के PDA फॉर्मूले को और मजबूत करने की कवायद माना जा रहा है।
2. भाजपा का अलर्ट मोड
4 जून को लखनऊ में भाजपा संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने सभी 98 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों को साफ निर्देश दिए — “पश्चिम बंगाल मॉडल अपनाओ और 1.76 लाख बूथ पालक तुरंत नियुक्त कर लो।” सीएम योगी आदित्यनाथ भी लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं और करोड़ों की योजनाओं का शिलान्यास कर रहे हैं। पार्टी ने प्रभारी मंत्रियों को भी फील्ड में भेज दिया है।
3. जनगणना और चुनाव ड्यूटी का टकराव — सबसे बड़ा कारण
देश में जनगणना का पहला चरण चल रहा है और दूसरा चरण फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। यूपी में इस काम के लिए 5.25 लाख शिक्षक और सैकड़ों प्रशासनिक अधिकारी लगे हैं। वहीं चुनाव के लिए 7 लाख से ज्यादा कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि अगर दोनों काम एक साथ हुए तो पूरा प्रशासनिक तंत्र ठप हो जाएगा। बोर्ड परीक्षाओं का टकराव भी एक बड़ी समस्या है।
आर्थिक मंदी का साया
आर्थिक मंदी और महंगाई का असर जनवरी-मार्च 2027 में सबसे ज्यादा दिख सकता है। भाजपा इसे रिस्क नहीं लेना चाहती। इसलिए कई सूत्र दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 में चुनाव कराए जाने की संभावना जता रहे हैं।
पार्टियों की तैयारियां जोरों पर
• सपा: अखिलेश यादव ने already 200 उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं।
• भाजपा: बूथ कमेटियों का फिजिकल वेरिफिकेशन चल रहा है।
• बसपा: मायावती ने करीब 50 सीटों पर प्रभारियों के नाम फाइनल कर दिए।
• सुभासपा: ओम प्रकाश राजभर ने 44 सीटों पर प्रभारी तैनात कर दिए।
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि भाजपा विपक्ष को तैयारी का समय नहीं देना चाहती। अचानक चुनाव कराने से सत्ता पक्ष को फायदा मिल सकता है।अभी अंतिम फैसला चुनाव आयोग को करना है, लेकिन वोटर लिस्ट के SIR कार्यक्रम और राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए यूपी में जल्द चुनाव की चर्चा काफी गर्म है।
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