ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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गौतमबुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा में सदर तहसील में तैनात महिला लेखपाल नीरज लता को जिलाधिकारी मेधा रूपम ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। महिला लेखपाल पर सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन अपने पति के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने का गंभीर आरोप है। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
सरकारी जमीन पति के नाम दर्ज कराने का आरोप
प्रशासन के अनुसार, नीरज लता सदर तहसील में लेखपाल के पद पर कार्यरत थीं। आरोप है कि उन्होंने अपनी आधिकारिक शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए बाजरपुर गांव स्थित करीब 450 वर्ग मीटर बंजर सरकारी जमीन के स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड में हेराफेरी की। जांच में सामने आया कि कथित रूप से फर्जी स्वामित्व संबंधी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन को अपने पति के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करा दिया गया। प्रशासन के मुताबिक, इस जमीन की वर्तमान बाजार कीमत 3 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
DM के संज्ञान में आने के बाद शुरू हुई जांच
सूत्रों के अनुसार, मामला जिलाधिकारी मेधा रूपम के संज्ञान में आने के बाद तत्काल गोपनीय जांच कराई गई। प्रारंभिक जांच में रिकॉर्ड में हेराफेरी और भ्रष्टाचार के संकेत मिलने पर डीएम ने महिला लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए। प्रशासन अब पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों की विस्तार से जांच कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित अनियमितता में कोई अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल था या नहीं।
तहसील में मचा हड़कंप
महिला लेखपाल के निलंबन के बाद सदर तहसील में कर्मचारियों के बीच हलचल का माहौल है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक सभी संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी।
प्रशासन का सख्त संदेश
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन, राजस्व अभिलेखों या सरकारी संपत्ति से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
जांच के बाद होगा अगला फैसला
फिलहाल महिला लेखपाल को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि आरोप कितने सही हैं और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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