ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को नोएडा से जोड़कर सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने के मामले में नोएडा पुलिस ने सख्त कदम उठाया है। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने कई सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।पुलिस का कहना है कि इन पोस्टों के जरिए नोएडा में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का गलत माहौल बनाने की कोशिश की गई।
किन अकाउंट्स पर दर्ज हुई FIR?
नोएडा साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इंस्टाग्राम के 'जंतर-मंतर लाइव 24 सच की बात जेन जेड', 'चर्चा जंक्शन न्यूज' और एक्स (पूर्व में ट्विटर) के 'Truthful Critical' नामक अकाउंट्स के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुसार, इन अकाउंट्स से ऐसे वीडियो और पोस्ट साझा किए गए जिनमें नोएडा में बड़े आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के भ्रामक दावे किए गए।
क्या किया गया था दावा?
पुलिस के मुताबिक, 22 जुलाई को एक इंस्टाग्राम पोस्ट में दावा किया गया कि:
• नोएडा के सेक्टर-63 में 45 हजार से अधिक श्रमिक वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
• सेक्टर-63 और चिल्ला बॉर्डर पर भारी जाम लगा हुआ है।
• कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
नोएडा पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन बताया। पुलिस का कहना है कि उस समय नोएडा में ऐसा कोई आंदोलन नहीं चल रहा था।
वायरल वीडियो पर भी उठाए सवाल
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि कुछ अकाउंट्स से ऐसे वीडियो भी साझा किए गए जिनमें पुलिसकर्मियों को आम लोगों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करते हुए दिखाया गया। इन पोस्टों में यह भी लिखा गया था कि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता की आधिकारिक पुष्टि बाकी है। साथ ही लोगों से इस पर टिप्पणी करने और विभिन्न मानवाधिकार संगठनों, पुलिस तथा मीडिया संस्थानों को टैग करने की अपील की गई।
पुलिस को साजिश का शक
नोएडा पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में ऐसा प्रतीत होता है कि इन पोस्टों के माध्यम से जानबूझकर एक भ्रामक नैरेटिव तैयार करने और लोगों को भड़काने की कोशिश की गई। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर गलत सूचनाएं फैलाना कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है, इसलिए ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस आयुक्त ने लोगों से की अपील
नोएडा पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी वीडियो, पोस्ट या संदेश को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि अवश्य करें। बिना पुष्टि के किसी भी सामग्री को आगे बढ़ाने से अफवाहें फैल सकती हैं और अनावश्यक तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
जांच जारी
साइबर क्राइम थाना अब संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स, पोस्ट के स्रोत और उन्हें साझा करने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रहा है। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति या समूह की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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