ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा में बढ़ते ट्रैफिक को कम करने और लोगों को बेहतर यातायात सुविधा देने के लिए एक बड़ी सड़क परियोजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है। एमपी-1 रोड पर बनने वाली प्रस्तावित एलिवेटेड रोड को अब पहले से अधिक लंबा किया गया है। यह सड़क अब रजनीगंधा अंडरपास (सेक्टर-3) से शुरू होकर सेक्टर-60 तक जाएगी और आगे एमपी-2 रोड से जुड़ेगी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली से नोएडा के आईटी और औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच काफी आसान हो जाएगी।
आईआईटी रुड़की तैयार करेगी डीपीआर
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डिजाइन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की जिम्मेदारी आईआईटी रुड़की को सौंपी गई है। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण ने कंसल्टेंसी शुल्क के रूप में लगभग एक करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि डीपीआर तैयार होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और फिर निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। उम्मीद है कि अगले महीने तक रिपोर्ट तैयार हो जाएगी।
5.43 किलोमीटर लंबी होगी एलिवेटेड रोड
संशोधित योजना के अनुसार, एलिवेटेड रोड की कुल लंबाई लगभग 5.43 किलोमीटर होगी। इसमें करीब 1.5 किलोमीटर का नया विस्तार जोड़ा गया है। यह 6-लेन एलिवेटेड रोड सेक्टर-3 से शुरू होकर सेक्टर-10, सेक्टर-12, सेक्टर-22 (टी-पॉइंट), सेक्टर-57 होते हुए सेक्टर-60 तक पहुंचेगी। इस मार्ग से नोएडा के प्रमुख औद्योगिक और आईटी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी पहले की तुलना में कहीं बेहतर होगी।
DND से सेक्टर-62 तक सफर होगा आसान
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को मिलेगा। एलिवेटेड रोड बनने के बाद डीएनडी से सेक्टर-62 तक का सफर करीब 10 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। वर्तमान में रजनीगंधा चौराहे से सेक्टर-12/22 और सेक्टर-56 तिराहे तक सुबह और शाम के समय भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिलता है। इस मार्ग से दिल्ली, इंदिरापुरम, खोड़ा और नोएडा के कई सेक्टरों का ट्रैफिक गुजरता है, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है।
सबसे चुनौतीपूर्ण होगा टी-पॉइंट का निर्माण
परियोजना का सबसे कठिन हिस्सा सेक्टर-12 और सेक्टर-22 के टी-पॉइंट को माना जा रहा है। यहां 90 डिग्री का तीखा मोड़ होने के कारण इंजीनियरिंग की दृष्टि से विशेष डिजाइन तैयार किया जा रहा है। आईआईटी रुड़की इस हिस्से के कर्व डिजाइन पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि भविष्य में ट्रैफिक की आवाजाही सुरक्षित और सुचारु बनी रहे।
700 करोड़ रुपये होगी अनुमानित लागत
फिलहाल इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 700 करोड़ रुपये आंकी गई है। हालांकि अंतिम लागत डीपीआर तैयार होने के बाद तय होगी। नोएडा प्राधिकरण का मानना है कि इस एलिवेटेड रोड के बनने से न केवल ट्रैफिक जाम में कमी आएगी, बल्कि दिल्ली और नोएडा के बीच आने-जाने वाले लाखों लोगों का समय भी बचेगा। इसके अलावा औद्योगिक और आईटी सेक्टर तक तेज़ और आसान पहुंच मिलने से क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी।
शहर की कनेक्टिविटी को मिलेगा नया आयाम
तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए यह परियोजना नोएडा के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि डीपीआर और अन्य मंजूरियां तय समय पर मिल जाती हैं, तो जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। इस एलिवेटेड रोड के बनने के बाद नोएडा की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और शहर की कनेक्टिविटी पहले से कहीं अधिक बेहतर हो जाएगी
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