ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा के डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन लगातार चर्चा में है। भारतीय किसान परिषद के नेतृत्व में चल रहे धरने में कई महिलाएं और पुरुष आमरण अनशन पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग डूब क्षेत्र की कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराना है। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से लिखित आश्वासन की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ बातचीत से समाधान नहीं निकला, इसलिए उन्होंने अनशन का रास्ता अपनाया है।
31 लोग अनशन पर बैठे
रिपोर्टों के मुताबिक आंदोलन के एक चरण में कुल 31 लोग आमरण अनशन पर बैठे थे। इनमें 23 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि डूब क्षेत्र की कई कॉलोनियों में लंबे समय से बिजली कनेक्शन की समस्या बनी हुई है। आंदोलनकारियों के अनुसार उन्होंने इससे पहले भी अलग-अलग तरीकों से अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाई थी। लेकिन जब उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिला तो धरना और अनशन शुरू किया गया।
महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी
इस आंदोलन की एक खास बात महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही। कई महिलाएं भी आमरण अनशन पर बैठीं। रिपोर्ट के मुताबिक अनशन के दौरान कुछ महिलाओं की तबीयत खराब हुई और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। लंबे समय तक बिना भोजन के रहने से स्वास्थ्य पर असर पड़ना स्वाभाविक है। इसलिए प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के दौरान स्वास्थ्य संबंधी स्थिति भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी।
बिजली के साथ दूसरी सुविधाओं की मांग
प्रदर्शनकारी सिर्फ बिजली कनेक्शन की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों की दूसरी बुनियादी समस्याओं का भी मुद्दा उठा रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि कई कॉलोनियों में लंबे समय से सुविधाओं की कमी है। कुछ रिपोर्टों में डूब क्षेत्र की करीब 42 कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन से जुड़ी समस्या का दावा भी किया गया है। यह आंकड़ा प्रदर्शनकारी संगठन की ओर से बताया गया है।
प्रशासन के सामने चुनौती
ऐसे आंदोलनों में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती होती है। एक तरफ लोगों की बिजली और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर समाधान तलाशना होता है, दूसरी तरफ लंबे अनशन से प्रदर्शनकारियों की सेहत को लेकर चिंता भी रहती है। रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच बातचीत हुई, लेकिन तत्काल कोई ठोस सहमति नहीं बनी। इसके बाद आंदोलन जारी रखने की घोषणा की गई। फिलहाल प्रदर्शनकारी लिखित आश्वासन की मांग पर कायम हैं। आगे बातचीत से समाधान निकलता है या आंदोलन और लंबा चलता है, यह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
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