ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा के सेक्टर-50 में पिटबुल के हमले की एक गंभीर घटना के बाद शहर में आक्रामक नस्ल के पालतू कुत्तों को लेकर बहस तेज हो गई है। इस घटना में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं। बताया जा रहा है कि पिटबुल के हमले से बचने की कोशिश के दौरान वह सड़क पर गिर गईं, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। घटना के बाद नोएडा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (NOFA) के पूर्व अध्यक्ष और संस्थापक सदस्य राजीव सिंह ने नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) कृष्णा करुणेश को पत्र लिखकर शहर में सख्त डॉग पॉलिसी लागू करने की मांग की है।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के मुताबिक, सेक्टर-50 में एक महिला अपने पालतू कुत्ते को टहला रही थीं। उसी समय एक अन्य व्यक्ति अपने पिटबुल के साथ वहां पहुंचा। आरोप है कि पिटबुल ने अचानक महिला और उनके पालतू कुत्ते पर हमला कर दिया। हमले से बचने की कोशिश में महिला सड़क पर गिर गईं, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मौजूदा नियमों पर उठे सवाल
घटना के बाद NOFA ने नोएडा प्राधिकरण की मौजूदा पेट पॉलिसी पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि वर्तमान नियमों के तहत ऐसी घटनाओं में केवल 10,000 रुपये का जुर्माना और पीड़ित के इलाज का खर्च वहन करने का प्रावधान है, जो गंभीर मामलों में पर्याप्त नहीं माना जा सकता। संगठन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा के लिए और अधिक सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए।
गाजियाबाद मॉडल अपनाने की मांग
नोएडा प्राधिकरण को भेजे गए पत्र में गाजियाबाद नगर निगम की तर्ज पर नई व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव में पिटबुल, रॉटवाइलर, डोगो अर्जेंटीनो जैसी आक्रामक नस्लों के कुत्तों के नए पंजीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही पहले से पाले गए ऐसे कुत्तों के लिए कड़े नियम लागू करने का सुझाव भी दिया गया है।
मजल और छोटी लीश अनिवार्य करने की मांग
पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि सार्वजनिक स्थानों जैसे पार्क, लिफ्ट, बेसमेंट और सोसायटी के कॉमन एरिया में आक्रामक नस्ल के कुत्तों के लिए मजल (Muzzle) और छोटी लीश (Short Leash) का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाए। इसके अलावा पालतू कुत्तों के मालिकों के लिए प्रशिक्षण, लाइसेंसिंग और जिम्मेदार पालतू पालन संबंधी नियमों को भी लागू करने की सिफारिश की गई है।
गंभीर मामलों में एफआईआर की मांग
NOFA ने यह भी मांग की है कि यदि किसी पालतू कुत्ते के हमले में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से घायल होता है, तो संबंधित मालिक के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संगठन का कहना है कि इससे लापरवाही करने वाले पालतू पशु मालिकों में जवाबदेही बढ़ेगी।
पहले से लागू हैं कई प्रतिबंध
उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही 23 आक्रामक नस्लों के कुत्तों पर प्रतिबंध लगा चुकी है। इनमें पिटबुल, रॉटवाइलर, डोगो अर्जेंटीनो, अकिता समेत कई नस्लें शामिल हैं। वहीं गाजियाबाद नगर निगम इन नस्लों के नए पंजीकरण और प्रजनन पर रोक लगा चुका है। पहले से पाले गए कुत्तों के लिए पंजीकरण और नसबंदी अनिवार्य की गई है।
नोएडा में भी सख्त नियमों की मांग तेज
सेक्टर-50 की इस घटना के बाद स्थानीय निवासी और आरडब्ल्यूए संगठन नोएडा में भी गाजियाबाद जैसी सख्त डॉग पॉलिसी लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आक्रामक नस्ल के पालतू कुत्तों को लेकर स्पष्ट और प्रभावी नियम बनाना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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