ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा में शहर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए Safe City Project पर काम किया जा रहा है। योजना के तहत करीब 2200 हाईटेक कैमरे लगाए जाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही शहर में पहले से लगे हजारों CCTV कैमरों को भी एक बड़े निगरानी नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।
एक जगह से होगी निगरानी
Safe City Project का मकसद शहर में अलग-अलग जगहों पर लगे कैमरों की जानकारी को एक सिस्टम से जोड़ना है। इससे पुलिस और प्रशासन को किसी घटना के बाद फुटेज तलाशने में कम समय लग सकता है। शहर में लगातार बढ़ती आबादी, ट्रैफिक और नई सड़कों के कारण निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
AI तकनीक का इस्तेमाल
नए सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की योजना है। इसमें फेस डिटेक्शन और ट्रैफिक मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। AI आधारित निगरानी का फायदा यह है कि सिस्टम बड़ी मात्रा में कैमरा फुटेज को तेजी से स्कैन कर सकता है। किसी संदिग्ध गतिविधि या ट्रैफिक से जुड़े मामले में पुलिस को शुरुआती जानकारी जल्दी मिल सकती है।
कंट्रोल रूम से निगरानी
योजना के तहत सेक्टर-94 में बने कंट्रोल रूम से शहर की निगरानी करने की व्यवस्था की जा रही है। यहां अलग-अलग कैमरों से आने वाली जानकारी को एक जगह देखा जा सकेगा। इस तरह किसी सड़क, चौराहे या संवेदनशील इलाके में होने वाली घटना पर पुलिस जल्दी प्रतिक्रिया दे सकती है।
2200 नए कैमरों के साथ पुराना नेटवर्क
नोएडा में पहले से बड़ी संख्या में CCTV कैमरे लगे हुए हैं। Safe City Project में नए कैमरों के साथ पुराने कैमरों को भी एकीकृत करने की योजना है। इससे शहर के अलग-अलग इलाकों में निगरानी का दायरा बढ़ सकता है। ट्रैफिक नियमों की निगरानी, अपराध के बाद जांच और सार्वजनिक जगहों की सुरक्षा में भी यह नेटवर्क उपयोगी हो सकता है। हालांकि ऐसे सिस्टम के साथ डेटा सुरक्षा और नागरिकों की प्राइवेसी जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण रहते हैं। तकनीक का इस्तेमाल करते समय इन पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
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