ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
दिल्ली और नोएडा को जोड़ने वाला एक्सप्रेसवे रोजाना लाखों यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। लेकिन पीक आवर में महामाया फ्लाईओवर से DND की तरफ जाने वाले हिस्से में ट्रैफिक जाम बड़ी समस्या बन जाता है। इस कॉरिडोर पर भारी वाहन दबाव के साथ सड़क की संरचना, अव्यवस्थित बस स्टॉप, कुछ जगहों पर अतिक्रमण और अलग-अलग फीडर मार्गों से आने वाला ट्रैफिक भी दबाव बढ़ाता है।
रोजाना लाखों वाहनों का दबाव
इस मार्ग पर प्रतिदिन करीब पांच लाख वाहनों के आवागमन का उल्लेख किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में वाहन एक ही कॉरिडोर का इस्तेमाल करते हैं तो पीक टाइम में छोटी रुकावट भी लंबा जाम पैदा कर सकती है। महामाया फ्लाईओवर से आगे दिल्ली की ओर बढ़ते समय कई स्थानों पर ट्रैफिक का दबाव तेजी से बढ़ता है। इसी वजह से सामान्य समय में कुछ मिनट का सफर पीक आवर में काफी लंबा हो जाता है।
जाम की कई वजहें
जाम के पीछे केवल वाहनों की संख्या ही कारण नहीं है। सड़क के कुछ हिस्सों में लेन कम होना, अनधिकृत बस स्टॉप, सड़क किनारे अतिक्रमण, गड्ढे, बैरियर और अलग-अलग रास्तों से आने वाला ट्रैफिक भी समस्या बढ़ाता है। जब वाहनों को एक संकरे हिस्से से गुजरना पड़ता है तो गति कम हो जाती है और पीछे वाहनों की लंबी कतार बन जाती है।
चिल्ला एलिवेटेड रोड की भूमिका
दिल्ली-नोएडा कनेक्टिविटी सुधारने के लिए चिल्ला एलिवेटेड रोड परियोजना लंबे समय से चर्चा में है। करीब 5.5 किलोमीटर लंबा हिस्सा चिल्ला से महामाया तक प्रस्तावित रहा है। इसके आगे लगभग दो किलोमीटर के विस्तार की योजना और DPR से जुड़े काम की भी रिपोर्ट सामने आई है। ऐसी परियोजनाओं का उद्देश्य मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करना है, लेकिन इनके वास्तविक प्रभाव का आकलन परियोजना पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा।
यात्रियों की समस्या
पीक टाइम में जाम का सबसे सीधा असर ऑफिस जाने वाले लोगों, छात्रों, कैब और बस यात्रियों पर पड़ता है। रोजाना इस मार्ग से सफर करने वालों के लिए कुछ किलोमीटर का जाम समय और ईंधन दोनों बढ़ा देता है। स्थायी समाधान के लिए सड़क क्षमता बढ़ाने, बस स्टॉप व्यवस्थित करने, अवैध कट और अतिक्रमण हटाने तथा वैकल्पिक मार्ग विकसित करने जैसे कदमों की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल इस कॉरिडोर पर ट्रैफिक दबाव नोएडा-दिल्ली कनेक्टिविटी की बड़ी चुनौतियों में शामिल है।
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