ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
नोएडा में यमुना को साफ करने की दिशा में एक बड़ा प्लान तैयार किया गया है। नोएडा प्राधिकरण करीब 17 किलोमीटर के यमुना क्षेत्र को प्रदूषण से बचाने के लिए नालों के पानी की सफाई पर फोकस कर रहा है। इसके लिए 24 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP लगाने की योजना बनाई गई है। इस पूरी योजना का मकसद यह है कि शहर के नालों से निकलने वाला गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के यमुना तक न पहुंचे।
नालों के पानी पर सबसे ज्यादा फोकस
नोएडा क्षेत्र में यमुना में जाने वाला मुख्य कोंडली नाला है। शहर के कई छोटे-बड़े नाले इसी सिस्टम से जुड़े हुए हैं। इसलिए नदी को साफ करने के लिए सीधे नदी की सफाई करने के बजाय नालों में आने वाले पानी को ट्रीट करना ज्यादा अहम माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक प्रस्तावित योजना के तहत नालों के किनारे कुल 24 STP लगाए जाने हैं। इनमें से 8 STP लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके अलावा तीन फाइको-फाइको ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए जाने की योजना है।
IIT दिल्ली कर रहा तकनीकी जांच
इस योजना में तकनीकी जांच का काम भी महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित 13 STP में से पांच की DPR यानी Detailed Project Report की जांच IIT दिल्ली की ओर से की जा रही है। इन पांच प्लांट को दिसंबर 2027 तक लगाने का लक्ष्य बताया गया है, जबकि बाकी आठ STP को दिसंबर 2028 तक तैयार करने की योजना है। इसका मतलब है कि परियोजना एक-दो महीने में पूरी होने वाली योजना नहीं है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
पानी की गुणवत्ता सुधारने का लक्ष्य
STP का मुख्य काम सीवेज के पानी को ट्रीट करना है। योजना के तहत नालों में आने वाले पानी की गुणवत्ता बेहतर करने पर जोर दिया जाएगा। पानी में COD और BOD जैसे प्रदूषण से जुड़े स्तरों को कम करना जरूरी है। अगर नालों का पानी साफ करके यमुना में छोड़ा जाता है, तो नदी में प्रदूषण का दबाव कम हो सकता है।
यमुना प्रदूषण सिर्फ नोएडा की समस्या नहीं
यमुना का प्रदूषण सिर्फ एक शहर की समस्या नहीं है। नदी से जुड़े अलग-अलग इलाकों में सीवेज ट्रीटमेंट की कमी और बिना साफ किया गया पानी बड़ी चुनौती है। एक रिपोर्ट के अनुसार यमुना कैचमेंट में रोजाना हजारों मिलियन लीटर घरेलू सीवेज निकलता है और उसके एक हिस्से का अभी भी पूरी तरह ट्रीटमेंट नहीं हो पाता। उत्तर प्रदेश में सीवेज ट्रीटमेंट का गैप भी बड़ी चिंता के रूप में सामने आया है।
केंद्र की बड़ी योजना भी जुड़ी है
यमुना को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए केंद्र स्तर पर भी बड़े निवेश वाली योजना तैयार की गई है। इसमें 18,600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रावधान बताया गया है। नोएडा की स्थानीय योजना इसी बड़े प्रयास के साथ जुड़ती दिखाई देती है। हालांकि किसी भी नदी की सफाई में सिर्फ प्लांट बनाना पर्याप्त नहीं होता। जरूरी है कि प्लांट लगातार सही क्षमता पर चलें और नालों का पानी वास्तव में ट्रीटमेंट सिस्टम तक पहुंचे।
आगे क्या होगा?
नोएडा में प्रस्तावित 24 STP और फाइको-फाइको प्लांट पूरे होने के बाद नालों से यमुना में जाने वाले पानी की गुणवत्ता सुधारने का लक्ष्य है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और उनके नियमित संचालन की होगी। अगर योजना तय समय के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो नोएडा क्षेत्र में यमुना प्रदूषण कम करने की कोशिश को इससे मदद मिल सकती है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!