ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
देशभर में छात्रों के आंदोलन और संसद मार्च के बाद अब इसे लेकर विपक्षी दलों के बीच सियासी खींचतान शुरू हो गई है। आंदोलन में युवाओं की बड़ी भागीदारी और पुलिस के साथ हुई झड़पों के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच इस आंदोलन का श्रेय लेने की होड़ दिखाई दे रही है। दोनों दल खुद को छात्रों की आवाज़ बताने में जुटे हैं और लगातार एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।
केजरीवाल ने दिखाई सक्रियता
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आंदोलन के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया कि उनके दोनों बच्चे संसद मार्च में छात्रों के साथ मौजूद थे। उन्होंने कहा कि जहां पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, वहां भी उनके बच्चे छात्रों के साथ थे। हालांकि, खुद प्रदर्शन में शामिल न होने पर उन्होंने पंजाब में व्यस्त होने का कारण बताया। इसके साथ ही उन्होंने हिरासत में लिए गए छात्रों को कानूनी सहायता देने की घोषणा की और इसके लिए एक विशेष व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया।
कांग्रेस ने भी बनाई लीगल टीम
केजरीवाल की पहल के बाद कांग्रेस भी सक्रिय हो गई। पार्टी ने एक गूगल फॉर्म जारी कर छात्रों से कानूनी मदद के लिए संपर्क करने की अपील की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि पार्टी ने आंदोलन से जुड़े छात्रों की सहायता के लिए विशेष लीगल टीम का गठन किया है। इसके अलावा राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता घायल छात्रों से मिलने राम मनोहर लोहिया अस्पताल भी पहुंचे।
राहुल गांधी ने पीएम आवास के बाहर दिया धरना
बाद में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया। राहुल गांधी ने देशभर के लोगों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों को न्याय मिलने तक कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि सरकार को जवाबदेह बनाना जरूरी है और जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक विरोध जारी रहेगा।
AAP ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कांग्रेस के अलग धरने पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस युवाओं के मूल आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। संजय सिंह ने कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में छात्रों के साथ है तो उसे जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का समर्थन करना चाहिए, न कि अलग धरना आयोजित करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई।
विपक्षी दलों ने भी दिखाई सक्रियता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई अन्य विपक्षी नेता भी अलग-अलग मंचों पर नजर आए। शरद पवार और सुप्रिया सुले जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों से मिले, जबकि बाद में सुप्रिया सुले राहुल गांधी के धरने में भी शामिल हुईं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी राहुल गांधी के समर्थन में पीएम आवास के बाहर पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान उन्हें भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। वहीं उनकी पत्नी और सांसद डिंपल यादव एक दिन पहले जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुई थीं।
आंदोलन से ज्यादा चर्चा श्रेय की राजनीति की
छात्र आंदोलन के बाद अब राजनीतिक बहस आंदोलन के मुद्दों से हटकर उसके नेतृत्व और श्रेय पर केंद्रित होती दिखाई दे रही है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों लगातार छात्रों के समर्थन का दावा कर रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है
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