ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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प्रधानमंत्री आवास के पास कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिए गए धरने को लेकर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन में कुछ ऐसे लोग शामिल हो गए हैं जो पूरे आंदोलन की दिशा बदलने की कोशिश कर रहे हैं। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने यह भी कहा कि भीड़ जुटाकर प्रधानमंत्री आवास की सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से पूरी सतर्कता बरतने और पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की साजिश की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
करीब तीन घंटे तक चला धरना
राहुल गांधी मंगलवार को कांग्रेस नेताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास के पास धरने पर बैठे। उनके साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। बाद में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी धरने में शामिल हो गए। धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। पार्टी का कहना था कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
सरकार की ओर से हुई बातचीत, लेकिन नहीं बनी सहमति
धरने के दौरान केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह राहुल गांधी से मिलने पहुंचे। दोनों पक्षों के बीच कुछ देर बातचीत भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। कांग्रेस अपने रुख पर कायम रही और प्रदर्शन जारी रखा। इसके बाद प्रशासन ने धरना समाप्त कराने की कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई धक्का-मुक्की
धरना स्थल पर पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच करीब आधे घंटे तक धक्का-मुक्की की स्थिति बनी रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने का प्रयास किया, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता धरने पर डटे रहे। इस दौरान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव को हिरासत में लिया गया
स्थिति को देखते हुए पुलिस ने राहुल गांधी को धरना स्थल से हटाया। उनके साथ प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव और अन्य कई विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। अखिलेश यादव पूरे समय राहुल गांधी के साथ मौजूद रहे और पुलिस कार्रवाई के दौरान उन्हें भी हिरासत में लेकर वहां से हटाया गया। बाद में सभी नेताओं को अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया।
सियासी बयानबाजी हुई तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस इसे छात्रों के समर्थन में लोकतांत्रिक विरोध बता रही है, वहीं दूसरी ओर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने धरने की मंशा और सुरक्षा पहलुओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अब यह मुद्दा केवल छात्रों के आंदोलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक विवाद बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं
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