ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं और अन्य प्रवक्ताओं के साथ बैठक कर टीवी डिबेट और सोशल मीडिया को लेकर कई जरूरी बातें कहीं। करीब दो घंटे चली इस बैठक में पार्टी के मीडिया से जुड़े काम और सार्वजनिक बयानबाजी पर चर्चा हुई। अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं से कहा कि बिना तैयारी के किसी टीवी डिबेट में नहीं जाना चाहिए। उनका कहना था कि किसी मुद्दे की पूरी जानकारी होने के बाद ही पार्टी का पक्ष सामने रखा जाना चाहिए।
हर मुद्दे पर बोलना जरूरी नहीं
बैठक में अखिलेश ने जाति और धर्म से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर खास सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में भाषा और शब्दों का चुनाव सोच-समझकर किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक हर मुद्दे पर पार्टी की तरफ से प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं है। कई बार किसी मुद्दे पर चुप रहना भी राजनीतिक संदेश हो सकता है। यह सलाह ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया पर किसी नेता या प्रवक्ता का बयान कुछ ही मिनटों में वायरल हो सकता है। किसी बयान का छोटा हिस्सा भी अलग संदर्भ में सोशल मीडिया पर तेजी से फैल सकता है।
10 सेकेंड की रील का भी असर
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया रील्स को लेकर भी प्रवक्ताओं को सावधान किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ 10 सेकेंड की रील से भी पार्टी की छवि बन या बिगड़ सकती है। उन्होंने यह भी समझाया कि टीवी डिबेट या सोशल मीडिया पर प्रवक्ता की कही गई बात को सिर्फ व्यक्तिगत राय नहीं माना जाता। जनता उसे पार्टी की स्थिति के तौर पर भी देख सकती है। इसलिए प्रवक्ताओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
2027 से पहले मीडिया रणनीति पर जोर
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दल अपनी मीडिया और सोशल मीडिया रणनीति पर लगातार काम कर रहे हैं। सपा के लिए भी टीवी डिबेट, डिजिटल प्लेटफॉर्म और छोटी वीडियो क्लिप महत्वपूर्ण हो चुके हैं। अखिलेश की बैठक से यह संकेत मिलता है कि पार्टी अपने सार्वजनिक बयानों को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से पेश करना चाहती है। आने वाले समय में पार्टी प्रवक्ताओं की गतिविधियों और सोशल मीडिया कंटेंट पर ज्यादा ध्यान दिए जाने की संभावना है।
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