ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश के औरैया के चर्चित डबल मर्डर केस में आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। करीब छह साल से ज्यादा समय तक चली सुनवाई के बाद विशेष MP/MLA कोर्ट ने पूर्व सपा MLC कमलेश पाठक समेत 11 आरोपियों को दोषी करार दिया। इनमें 10 आरोपियों को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही सभी पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। लंबे समय से चल रहे इस मामले में फैसला आने के बाद अब पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद मिली है।
यह मामला 15 मार्च 2020 का है। औरैया के पंचमुखी हनुमान मंदिर में जमीन के विवाद को लेकर कहासुनी हुई थी। इसी विवाद के बाद अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था और मामला काफी चर्चा में रहा था।
जांच आगे बढ़ने के साथ कई लोगों के नाम सामने आए और मामला अदालत तक पहुंचा। चूंकि इस केस में एक पूर्व जनप्रतिनिधि का नाम भी जुड़ा था, इसलिए इसकी सुनवाई पर लगातार लोगों की नजर बनी रही।
इस मामले की सबसे खास बात इसकी लंबी कानूनी प्रक्रिया रही। अदालत में करीब 6 साल 5 महीने तक सुनवाई चली। इस दौरान 900 से ज्यादा तारीखें पड़ीं। अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से कुल 72 गवाह अदालत के सामने पेश हुए।
इतनी लंबी सुनवाई के बाद बुधवार, 19 अगस्त को विशेष MP/MLA कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुनाया। न्यायाधीश विनय प्रकाश सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों को दोषी माना।
इस मामले में दोषी ठहराए गए कमलेश पाठक औरैया की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह काफी कम उम्र में समाजवादी पार्टी से विधायक बने थे। साल 1990 में वह विधान परिषद सदस्य भी रहे। इसके बाद उन्हें 1991 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बनाया गया।
उन्होंने दिबियापुर विधानसभा सीट से 2002 का चुनाव जीता था। हालांकि 2007 में इसी सीट से चुनाव हार गए। इसके बाद 2012 में उन्होंने सिकंदरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन वहां भी उन्हें हार मिली। बाद में 2013 में उन्हें रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया और 2015 में वह दोबारा MLC बने।
अदालत के फैसले के बाद इस मामले में दोषी ठहराए गए लोगों के सामने अब कानूनी अपील का रास्ता खुला है। वहीं, इस फैसले को लंबे समय से चले आ रहे मामले में एक बड़ा पड़ाव माना जा रहा है।
डबल मर्डर जैसे गंभीर मामले में करीब छह साल से ज्यादा समय तक चली सुनवाई यह भी दिखाती है कि बड़े आपराधिक मामलों में अदालत के सामने हर पक्ष की बात और गवाहों के बयान कितने महत्वपूर्ण होते हैं। 900 से ज्यादा तारीखों और 72 गवाहों के बाद आया यह फैसला अब औरैया के इस चर्चित मामले का सबसे बड़ा घटनाक्रम बन गया है।
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