ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाएं लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं। अब इन्हीं योजनाओं का जिक्र करते हुए उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अमेरिका की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 5,000 डॉलर के प्रस्ताव को कर्नाटक के गारंटी मॉडल से जोड़ते हुए दावा किया कि अमेरिका में भी इसी तरह की सोच दिखाई दे रही है। शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की योजनाओं को लेकर पहले काफी सवाल उठाए गए थे, लेकिन अब दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी लोगों को ऐसी योजनाओं में दिलचस्पी दिखाई दे रही है। उन्होंने इसी संदर्भ में ट्रंप के प्रस्ताव का उदाहरण दिया।
क्या है ट्रंप का 5,000 डॉलर वाला प्रस्ताव?
दरअसल, ट्रंप ने एक प्रस्ताव रखा है जिसके तहत अगर रिपब्लिकन पार्टी आगामी मिडटर्म चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में अपना नियंत्रण बनाए रखती है, तो अमेरिकी वयस्कों को 5,000 डॉलर तक का भुगतान किए जाने की बात कही गई है। यह प्रस्ताव अभी लागू योजना नहीं है और इसे आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी सहित कई प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसी प्रस्ताव को लेकर शिवकुमार ने कर्नाटक की पांच गारंटी योजनाओं का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने चुनावी वादों को योजनाओं में बदलकर लोगों तक सीधा लाभ पहुंचाने की कोशिश की है।
कर्नाटक की गारंटी योजनाएं क्या हैं?
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद पांच प्रमुख गारंटी योजनाएं लागू की थीं। इनमें महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, परिवार की महिला मुखिया को आर्थिक सहायता, बेरोजगार युवाओं के लिए सहायता, मुफ्त बिजली और गरीब परिवारों के लिए खाद्यान्न से जुड़ी योजना शामिल हैं। इन योजनाओं को कांग्रेस ने अपने चुनावी वादों का अहम हिस्सा बनाया था। सरकार का कहना है कि इनसे बड़ी संख्या में लोगों को सीधा फायदा मिला है। दूसरी ओर, इन योजनाओं के खर्च और राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। यही वजह है कि शिवकुमार का ट्रंप के प्रस्ताव को कर्नाटक मॉडल से जोड़ना राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शिवकुमार के बयान पर क्यों हो रही चर्चा?
शिवकुमार का बयान सिर्फ अमेरिका से जुड़ी टिप्पणी नहीं है। इसके जरिए उन्होंने कांग्रेस की कल्याणकारी राजनीति को भी सामने रखा है। उनका संदेश साफ है कि जनता को सीधे आर्थिक या सामाजिक लाभ देने वाली योजनाएं चुनावी राजनीति में प्रभाव डाल सकती हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कर्नाटक की योजनाओं को लेकर कांग्रेस का दावा सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं है। पार्टी इन योजनाओं को अपने शासन मॉडल के तौर पर पेश करती रही है।
हालांकि, अमेरिका और कर्नाटक की अर्थव्यवस्था, सरकारी व्यवस्था और योजनाओं की प्रकृति अलग है। इसलिए दोनों की सीधी तुलना करना आसान नहीं है। ट्रंप का प्रस्ताव भी अभी सिर्फ एक राजनीतिक घोषणा के स्तर पर है और इसे लागू करने के लिए आगे की कानूनी और वित्तीय प्रक्रिया जरूरी होगी।
आगे क्या होगा?
ट्रंप के प्रस्ताव को लेकर अमेरिका में भी बहस जारी है। वहीं भारत में डीके शिवकुमार के बयान ने कांग्रेस की गारंटी योजनाओं को फिर से राजनीतिक चर्चा में ला दिया है। कर्नाटक में सरकार इन योजनाओं को अपनी बड़ी उपलब्धि बताती है, जबकि विपक्ष इनके वित्तीय बोझ पर सवाल उठाता है। ऐसे में शिवकुमार का यह बयान आने वाले समय में कर्नाटक की राजनीति में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात यही है कि कर्नाटक की चुनावी गारंटी योजनाओं का उदाहरण अब अमेरिकी राजनीति के संदर्भ में दिया जा रहा है। इससे साफ है कि चुनावी वादों और सीधे आर्थिक लाभ वाली योजनाओं की राजनीति भारत ही नहीं, दुनिया के दूसरे लोकतंत्रों में भी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।
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