ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
बीजेपी सांसद कंगना रनौत की Gen-Z को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कंगना ने हाल ही में Gen-Z को "जेनरेशन गटर" कहा था, जिसके बाद अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने इस बयान पर जवाब देते हुए कहा कि नेताओं को अपनी भाषा और शब्दों की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
"उनकी पार्टी के लोग भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेते"
सौरव दास ने कंगना रनौत पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कोई उनकी बात को गंभीरता से लेता है। उन्होंने कहा कि उनकी अपनी पार्टी के लोग भी उन्हें ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते, इसलिए उनकी टिप्पणी पर अधिक प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे नेताओं को अपनी भाषा का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि उनके शब्दों का समाज पर असर पड़ता है।
"नेताओं को अपनी शब्दावली संभालनी चाहिए"
सौरव दास ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को अपने पद की गरिमा के अनुरूप बोलना चाहिए। उनके अनुसार, Gen-Z ने लोकतंत्र में भागीदारी बढ़ाने और युवाओं की आवाज उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास मजबूत करने का काम किया है और ऐसे में उनके लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता।
प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग दोहराई
सौरव दास ने छात्र आंदोलन से जुड़ी अपनी मांगों को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस ली जानी चाहिए। साथ ही भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं किए जाने की लिखित गारंटी भी सरकार को देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों की रिहाई उनकी प्रमुख मांगों में शामिल रही है। उनके अनुसार, यदि किसी समझौते की बात हुई है तो उसका पूरी तरह पालन होना चाहिए।
सरकार के नोटिफिकेशन का इंतजार
सौरव दास ने बताया कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ देर रात तक बैठक हुई थी, जिसमें प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों और संभावित नोटिफिकेशन पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किए हैं और अब वे केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं।उनका कहना था कि सरकार को बातचीत में हुई सहमति के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
बयान से छिड़ी नई राजनीतिक बहस
कंगना रनौत की Gen-Z पर की गई टिप्पणी और उस पर सौरव दास की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सोशल मीडिया दोनों पर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर भाषा और राजनीतिक मर्यादा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर छात्र आंदोलन और प्रदर्शनकारियों से जुड़े मुद्दे भी एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गए हैं। फिलहाल, सरकार की ओर से संभावित नोटिफिकेशन और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!