ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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वंदे मातरम् को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच चल रहे विवाद में अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी खुलकर सामने आए हैं। हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कई सवाल उठाए हैं। ओवैसी ने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी से ज्यादा समझदार हैं? क्या वह रवींद्रनाथ टैगोर से ज्यादा बुद्धिमान हैं? उन्होंने अपने बयान में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भी जिक्र किया।
ओवैसी ने गांधी और टैगोर का क्यों लिया नाम?
हैदराबाद में ईद मिलाद-उन-नबी के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने वंदे मातरम् को लेकर चल रही बहस पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस जैसे राष्ट्रीय नेताओं ने मिलकर यह तय किया था कि वंदे मातरम् के शुरुआती दो अंतरों को ही गाया जाएगा। ओवैसी ने सवाल किया कि अगर इन बड़े नेताओं ने इस मुद्दे पर फैसला लिया था तो क्या नरेंद्र मोदी उनसे ज्यादा समझदार हैं?
उन्होंने कहा कि देश में रहने वाले लोगों की धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं। उनके मुताबिक, कोई देश की पूजा करता है तो कोई इसी देश की मिट्टी में दफन होता है। इसलिए भारत सभी नागरिकों का देश है और सभी की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
‘भारत को खुदा मानो, मैं कैसे मानूंगा?’
ओवैसी ने वंदे मातरम् को लेकर अपने विचार रखते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति से भारत को खुदा मानने के लिए कहा जाएगा तो वह इसे स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने संविधान का भी जिक्र किया। AIMIM प्रमुख ने कहा कि भारत का संविधान ‘हम भारत के लोग’ से शुरू होता है। उनके मुताबिक, संविधान किसी एक धर्म या समुदाय की बात नहीं करता, बल्कि देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है। ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह का कानून बनाकर BJP और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे नेताओं के फैसले की अनदेखी कर रहे हैं।
कांग्रेस भी BJP पर हमलावर
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच पहले से ही तीखी बयानबाजी चल रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नरेंद्र मोदी सरकार और बीजेपी पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। खरगे का कहना है कि कांग्रेस वंदे मातरम् के उसी संस्करण को गाती है, जिसे देश के कई बड़े नेताओं ने स्वीकार किया था। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल जैसे नेताओं ने वंदे मातरम् के अंतरों को छह से घटाकर दो करने का फैसला किया था।
अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया गंभीर आरोप
दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के इस रुख पर तीखा हमला किया है। शाह ने आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने का फैसला राष्ट्रविरोधी था और यह वोट बैंक की राजनीति को ध्यान में रखकर किया गया। BJP ने भी कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्ति संविधान और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता।
वंदे मातरम् पर बढ़ती सियासी बहस
वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुई बहस अब केवल राष्ट्रगीत या राष्ट्रीय भावना तक सीमित नहीं रह गई है। इस मुद्दे पर इतिहास, संविधान, धर्म और राजनीति—चारों पहलू एक साथ सामने आ रहे हैं। ओवैसी के ताजा बयान के बाद इस विवाद में एक और राजनीतिक आवाज जुड़ गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में BJP, कांग्रेस और अन्य दलों के बीच वंदे मातरम् को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।
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