ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
पंजाब में नशे का मुद्दा एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गया है। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में ड्रग्स को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं। इसी बीच राघव चड्ढा ने पंजाब में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। उन्होंने राज्य में नशे की स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि इस समस्या को सिर्फ बयानबाजी से नहीं, बल्कि जमीन पर काम करके खत्म करना होगा। चड्ढा के मुताबिक यह यात्रा 18 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगी। इसका मुख्य मुद्दा पंजाब को नशे से मुक्त करने की मांग रहेगा। यात्रा के जरिए वह लोगों के बीच जाकर नशे की समस्या और इससे प्रभावित परिवारों की आवाज उठाने की कोशिश करेंगे।
18 से 30 सितंबर तक चलेगी यात्रा
राघव चड्ढा ने बताया कि ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ को लेकर पार्टी स्तर पर चर्चा हुई है और इसके बाद कार्यक्रम तय किया गया। यात्रा के दौरान पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में जाकर नशे के मुद्दे को उठाया जाएगा। इस अभियान का मकसद सिर्फ राजनीतिक सभा करना नहीं, बल्कि उन परिवारों की परेशानियों को सामने लाना भी बताया गया है, जो नशे की वजह से प्रभावित हुए हैं। पंजाब में ड्रग्स लंबे समय से एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा रहा है। चुनावों के समय यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ जाता है। ऐसे में चड्ढा की यात्रा को राजनीतिक अभियान के साथ-साथ सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
सरकार पर क्या आरोप लगाए?
राघव चड्ढा ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि राज्य में ड्रग्स की उपलब्धता अब भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। उन्होंने ‘चिट्टा’ यानी हेरोइन के खुले तौर पर बिकने का आरोप लगाते हुए सरकार से पूछा कि अगर राज्य में नशे के खिलाफ अभियान चल रहा है तो फिर आम लोगों तक ड्रग्स पहुंच कैसे रही है। हालांकि, ये आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और सरकार की ओर से नशे के खिलाफ कार्रवाई और अभियानों का दावा किया जाता रहा है। राज्य में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ नशा मुक्ति और पुनर्वास पर भी काम होने की जानकारी सामने आती रही है।
नशे से जुड़े परिवारों की परेशानी भी मुद्दा
पंजाब में नशे की समस्या सिर्फ राजनीति का मुद्दा नहीं है। इससे कई परिवार सीधे प्रभावित होते हैं। नशे की लत के कारण परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है। कई मामलों में युवा अपराध की तरफ भी बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में सिर्फ तस्करों पर कार्रवाई करना काफी नहीं माना जाता। नशे की लत से जूझ रहे लोगों के इलाज, परिवारों की मदद और युवाओं को रोजगार और बेहतर अवसर देने जैसे मुद्दे भी जरूरी हैं। हाल के आंकड़ों में पंजाब के सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी भी सामने आई है। इससे एक तरफ यह संकेत मिलता है कि समस्या गंभीर है, वहीं यह भी दिखता है कि ज्यादा लोग इलाज और मदद के लिए सामने आ रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
नशे के मुद्दे के साथ पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार सरकार पर सवाल उठा रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि मौजूदा व्यवस्था नशे की समस्या को पूरी तरह रोकने में सफल नहीं हुई है। दूसरी तरफ सरकार की ओर से नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई का दावा किया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले अभियान के दौरान ड्रग्स से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं और भारी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए हैं। यानी पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई को लेकर सरकार और विपक्ष के दावे अलग-अलग हैं। इसी वजह से यह मुद्दा आने वाले चुनाव में भी बड़ा रोल निभा सकता है।
AAP पर राघव चड्ढा का सीधा हमला
राघव चड्ढा ने सिर्फ नशे के मुद्दे पर ही सरकार को घेरने की कोशिश नहीं की। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। हालिया बयान में उन्होंने AAP पर लगातार उनका नाम लेने को लेकर तंज कसा और पार्टी की तुलना ‘एक्स गर्लफ्रेंड’ से कर दी। यह बयान ऐसे समय आया है जब चड्ढा और AAP के बीच राजनीतिक दूरी काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में उनके बयान को सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति में बदलते समीकरणों के हिस्से के तौर पर भी देखा जा रहा है।
चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा बन सकता है ड्रग्स
पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक दल जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। नशे का मुद्दा इनमें सबसे अहम हो सकता है। राघव चड्ढा की यात्रा इसी मुद्दे को लोगों के बीच ले जाने की कोशिश है। अगर यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग जुड़ते हैं और नशे से प्रभावित परिवार अपनी समस्याएं सामने रखते हैं, तो इससे सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। लेकिन सिर्फ यात्रा या राजनीतिक बयान से पंजाब की ड्रग्स समस्या खत्म नहीं होगी। इसके लिए तस्करी पर सख्त कार्रवाई के साथ इलाज, पुनर्वास और युवाओं के लिए बेहतर अवसर भी जरूरी होंगे।
फिलहाल ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के ऐलान ने राज्य की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है। 18 सितंबर से शुरू होने वाली इस यात्रा पर अब राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर रहेगी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नशे का मुद्दा चुनावी राजनीति को कितना प्रभावित करता है और सरकार इस पर विपक्ष के सवालों का किस तरह जवाब देती है।
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