ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन पर अब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सांसद पप्पू यादव द्वारा किया गया प्रदर्शन उचित नहीं था, क्योंकि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले से संतों का कोई संबंध नहीं है। रामगोपाल यादव के इस बयान को समाजवादी पार्टी की ओर से इस विवाद पर आई पहली स्पष्ट प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
क्या था पूरा मामला?
संसद परिसर में विपक्षी दलों के प्रदर्शन के दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर एक सांकेतिक नाटक करते नजर आए। इस प्रदर्शन का उद्देश्य राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों को उठाना था। प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा सांसद अवधेश प्रसाद और धर्मेंद्र यादव समेत कई विपक्षी नेता भी मौजूद थे। इस दौरान पप्पू यादव दानपेटी के साथ बैठे दिखाई दिए और सांकेतिक रूप से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी हुई है।
रामगोपाल यादव ने क्या कहा?
मीडिया से बातचीत में रामगोपाल यादव ने कहा कि यह प्रदर्शन सही नहीं था। उनके अनुसार, यदि किसी कथित चोरी का आरोप है तो उसका संबंध संबंधित लोगों से हो सकता है, लेकिन संतों को उससे जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि "राम मंदिर में कथित चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं है। यह नहीं होना चाहिए था।" हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी राम मंदिर चढ़ावा मामले से जुड़े सवाल आगे भी उठाती रहेगी।
साधु-संतों ने जताई नाराजगी
इस प्रदर्शन के बाद कई साधु-संतों और हिंदू संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि भगवा वस्त्र पहनकर किए गए इस नाटक से संत परंपरा और धार्मिक भावनाओं का अपमान हुआ है। इसी मामले में वाराणसी में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस प्रदर्शन से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब केवल संसद के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं। एक ओर विपक्ष कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन के तरीके को लेकर विपक्ष के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आने लगी है। रामगोपाल यादव का बयान इसी बहस में अहम माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने प्रदर्शन के तरीके पर असहमति जताई, लेकिन कथित चढ़ावा विवाद के मुद्दे को उठाने की बात भी दोहराई। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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