ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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चुनाव आयोग ने मंगलवार से देश के 12 राज्यों में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान की शुरुआत कर दी है। इस प्रक्रिया के तहत पुराने मतदाता रिकॉर्ड की समीक्षा और नए नामों का पंजीकरण किया जा रहा है। लेकिन इसकी शुरुआत के पहले ही दिन पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में इसका जोरदार विरोध शुरू हो गया। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि SIR का इस्तेमाल सत्ताधारी दल के राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है।
बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का विरोध
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है और बंगाल में वोटर्स के नाम काटने की साजिश रची जा रही है।
अभिषेक ने सवाल उठाया कि “अगर उद्देश्य घुसपैठियों के नाम हटाना है, तो सिर्फ बंगाल में ही SIR क्यों? असम, त्रिपुरा या मणिपुर जैसे राज्यों में, जहां बीजेपी की सरकारें हैं और जो सीमावर्ती राज्य हैं, वहां यह प्रक्रिया क्यों नहीं की जा रही?”
उन्होंने चेतावनी दी कि “अगर बंगाल में एक भी असली वोटर का नाम काटा गया, तो तृणमूल कांग्रेस के लाखों कार्यकर्ता चुनाव आयोग के खिलाफ सड़कों पर उतर आएंगे।” TMC का कहना है कि दो महीने में पूरी वोटर लिस्ट की समीक्षा करना अव्यवहारिक है और इससे “जानबूझकर” गलतियां कराई जा सकती हैं।
बीजेपी ने पलटवार किया
अभिषेक बनर्जी के आरोपों पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार ने कहा कि “TMC का विरोध इसलिए है क्योंकि उन्होंने बंगाल में घुसपैठियों को बसाया है और उन्हें वोटर बना दिया है। अब जब आयोग वोटर लिस्ट साफ कर रहा है, तो उन्हें डर लग रहा है कि उनका वोट बैंक खत्म हो जाएगा।” बीजेपी ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव आयोग से कार्रवाई की भी मांग की है।
तमिलनाडु में भी SIR के खिलाफ सियासी आग
पश्चिम बंगाल की तरह तमिलनाडु में भी DMK ने SIR के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने आरोप लगाया कि बीजेपी का तमिलनाडु में वोट बेस कमजोर है, इसलिए वह AIADMK के साथ मिलकर बैकडोर राजनीति करना चाहती है। स्टालिन ने कहा कि “दलित, अल्पसंख्यक और महिलाओं के नाम लिस्ट से हटाकर बीजेपी चुनावी लाभ लेना चाहती है।”
उन्होंने 2 नवंबर को चेन्नई में बड़ी रैली और पूरे तमिलनाडु में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। DMK ने पहले भी आयोग से SIR की प्रक्रिया स्थगित करने और वोटर लिस्ट अपडेट करने के लिए उचित समय देने की मांग की थी, जिसे आयोग ने नजरअंदाज कर दिया।
AIADMK ने किया SIR का समर्थन
वहीं AIADMK ने SIR का स्वागत करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र को मजबूत करने का कदम है। पार्टी नेता कोवई साथ्यन ने कहा, “DMK बोगस वोटर्स के सहारे चुनाव जीतती रही है, अब जब आयोग फर्जी वोटर्स को हटाने जा रहा है, तो उन्हें डर सता रहा है।” उन्होंने कहा कि कोर्ट ने भी वोटर लिस्ट साफ करने की जरूरत बताई थी, इसलिए SIR सही दिशा में उठाया गया कदम है।
बहरहाल, एक तरफ जहां चुनाव आयोग SIR को पारदर्शी चुनाव की दिशा में जरूरी कदम बता रहा है, वहीं बंगाल और तमिलनाडु में यह राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है। अब देखना यह होगा कि आयोग इस विवाद के बीच पारदर्शिता और विश्वास कैसे कायम रखता है।
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