ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बड़े बयान के बाद अब NDA के सहयोगी दलों की अलग-अलग राय सामने आने लगी है। खासतौर पर बिहार की सत्तारूढ़ JDU ने UCC के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बीजेपी के रुख से दूरी का संकेत दिया है। अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि NDA की सरकार वाले सभी राज्यों में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता लागू करने की कोशिश की जाएगी। उनके इस बयान को बीजेपी के पुराने एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है।
JDU ने जताई असहमति
अमित शाह के बयान के बाद JDU की ओर से UCC को लेकर आपत्ति सामने आई है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए। JDU का रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी बिहार में NDA की प्रमुख सहयोगी है। राज्य में बीजेपी और JDU मिलकर सरकार चला रहे हैं और 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद दोनों दलों का गठबंधन सत्ता में है। ऐसे में UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर दोनों पार्टियों की अलग राय राजनीतिक चर्चा का कारण बन गई है।
क्या है UCC?
समान नागरिक संहिता का मतलब देश में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे निजी मामलों में समान कानून लागू करना है। अभी अलग-अलग धार्मिक समुदायों के निजी मामलों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून मौजूद हैं। बीजेपी लंबे समय से देश में UCC लागू करने की वकालत करती रही है। पार्टी का तर्क है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान कानून होने से समानता और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत किया जा सकता है। हालांकि, इसके विरोध में रहने वाले दल और संगठन इसे धार्मिक और सामाजिक मामलों में दखल के तौर पर देखते हैं। इसी वजह से UCC लंबे समय से देश की राजनीति में बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
2029 से पहले लागू करने की बात
अमित शाह का बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने की बात कही है। इसका मतलब साफ है कि आने वाले वर्षों में बीजेपी इस मुद्दे को राजनीतिक और नीतिगत स्तर पर आगे बढ़ा सकती है। कुछ राज्यों में UCC को लेकर पहले ही कदम उठाए जा चुके हैं। अब नजर उन राज्यों पर है, जहां बीजेपी या उसके सहयोगी सत्ता में हैं।
बिहार में क्या होगा असर?
बिहार में JDU की असहमति इस पूरे मुद्दे को और दिलचस्प बना देती है। विधानसभा चुनाव और उसके बाद के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए बीजेपी और JDU के बीच तालमेल काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में सवाल है कि क्या UCC जैसे मुद्दे पर दोनों दल अपने मतभेदों को किनारे रख पाएंगे या यह मामला आने वाले समय में NDA के लिए नई चुनौती बनेगा? फिलहाल इतना साफ है कि UCC अब सिर्फ बीजेपी बनाम विपक्ष का मुद्दा नहीं रह गया है। NDA के भीतर भी इसे लेकर अलग-अलग आवाजें सुनाई देने लगी हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर बिहार की राजनीति में और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
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