ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। राज्य की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में वोटों का गणित इस समय चर्चा का बड़ा विषय है। मौजूदा संख्या के हिसाब से भारतीय जनता पार्टी आठ सीटों के लिए जरूरी वोट जुटाने की स्थिति में बताई जा रही है, लेकिन नौवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। एक राज्यसभा सीट के लिए 36 वोट का कोटा माना जा रहा है। इस हिसाब से आठ सीटों के लिए 288 वोट की जरूरत होगी। नौवीं सीट तक पहुंचने के लिए कुल 324 वोट चाहिए होंगे। उपलब्ध संख्या के हिसाब से भाजपा के सामने करीब 25 वोटों की कमी बताई जा रही है।
अब नजर दूसरे दलों के विधायकों पर
यही वजह है कि चुनाव से पहले दूसरे दलों के विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं। ऐसे चुनाव में हर विधायक का वोट सीधे तौर पर सीटों के गणित को प्रभावित कर सकता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की संख्या काफी महत्वपूर्ण है। लेकिन अतिरिक्त सीट के लिए सिर्फ अपने मौजूदा समर्थन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना जा रहा। इसी कारण सपा के कुछ विधायकों के रुख पर भी नजर रखी जा रही है।
राज्यसभा चुनाव का गणित विधानसभा से अलग
राज्यसभा चुनाव को समझने के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि यहां आम चुनाव की तरह जनता सीधे वोट नहीं देती। राज्यसभा के लिए राज्यों के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं। इसलिए विधानसभा में किसी पार्टी की संख्या का सीधा असर राज्यसभा चुनाव पर पड़ता है। उत्तर प्रदेश में इस बार 10 सीटों का चुनाव होने की वजह से संख्या का महत्व और बढ़ गया है। पार्टियों के उम्मीदवारों की संख्या और उनके पास मौजूद विधायक दोनों को देखकर संभावित गणित तैयार किया जाता है।
क्रॉस वोटिंग पर भी नजर
ऐसे चुनावों में क्रॉस वोटिंग हमेशा चर्चा में रहती है। हालांकि किसी विधायक के अंतिम मतदान व्यवहार को पहले से तय मानना ठीक नहीं है। राजनीतिक दल अपने विधायकों को अपने उम्मीदवार के पक्ष में मतदान के लिए रणनीति बनाते हैं और अंतिम परिणाम मतदान के बाद ही साफ होता है। सपा और भाजपा दोनों के सामने अपने-अपने उम्मीदवारों को पर्याप्त वोट दिलाने की चुनौती है। अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने की स्थिति में संख्या का हर वोट महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस पूरे चुनाव में इसलिए सिर्फ उम्मीदवारों के नाम नहीं, बल्कि विधानसभा की मौजूदा संख्या और सहयोगी दलों के समर्थन को समझना भी जरूरी है। भाजपा की नौवीं सीट की कोशिश के सामने 25 अतिरिक्त वोटों का जो आंकड़ा बताया जा रहा है, वह इस चुनाव के गणित को समझने का सबसे अहम हिस्सा है।
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