ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पेरिस ओलिंपिक में भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले युवा पहलवान अमन सहरावत को रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने एक साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। यह कार्रवाई सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप 2025 में ओवरवेट होने के कारण उनके डिसक्वालिफिकेशन के बाद की गई।
मामला क्या है?
22 वर्षीय अमन सहरावत क्रोएशिया में 13 से 21 सितंबर के बीच हुई सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत की ओर से 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कैटेगरी में उतरने वाले थे। लेकिन उनका वजन 1.7 किलोग्राम अधिक पाया गया। इसके कारण उन्हें प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया।
WFI ने 23 सितंबर को अमन को कारण बताओ नोटिस जारी किया और 29 सितंबर तक जवाब मांगा। अमन ने जवाब दिया, लेकिन फेडरेशन की अनुशासन समिति ने इसे असंतोषजनक पाया। इसके बाद फेडरेशन ने उन्हें एक साल के लिए प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया।
कोचिंग स्टाफ भी सवालों के घेरे में
फेडरेशन ने अमन के मुख्य कोच जगमंदर सिंह और कोचिंग स्टाफ के तीन अन्य सदस्यों – विनोद, वीरेंद्र और नरेंद्र – से भी स्पष्टीकरण मांगा। कारण यह था कि उन्होंने खिलाड़ी के वजन की निगरानी में लापरवाही बरती। WFI का कहना है कि ओलिंपिक पदक विजेता खिलाड़ी से उच्च स्तर की प्रोफेशनलिज्म और अनुशासन की उम्मीद की जाती है।
वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रदर्शन
इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत को केवल एक ब्रॉन्ज मेडल ही मिला। महिलाओं की 53 किग्रा कैटेगरी में अंतिम पंघाल ने पदक जीता।
ओवरवेट नियम
2023 में जारी वर्ल्ड यूनाइटेड रेसलिंग के नियमों के अनुसार:
• वर्ल्ड कप और रैंकिंग सीरीज में 2 किलो तक ओवरवेट की अनुमति है।
• लेकिन ओलिंपिक गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप में कोई छूट नहीं है।
• यदि वजन 1 ग्राम भी अधिक हो, तो पहलवान को डिसक्वालिफाई किया जा सकता है।
अमन इस नियम के तहत डिसक्वालिफाई हुए।
पेरिस ओलिंपिक में उनका प्रदर्शन
अमन सहरावत ने पेरिस ओलिंपिक में सेमीफाइनल के बाद 10 घंटे में 4.6 किलोग्राम वजन घटाया था। उनका मैच वजन कैटेगरी 57 किग्रा के लिए निर्धारित था, लेकिन उनका वजन 61.5 किग्रा था। उन्होंने ओलंपिक में प्यूर्टो रिको के डरियन टोई क्रूज को 13-5 से हराकर भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया।
वे भारत के सबसे युवा ओलंपिक मेडलिस्ट बने, केवल 21 साल और 24 दिन की उम्र में। इससे पहले, पीवी सिंधु ने 21 साल और 1 महीने 14 दिन की उम्र में रियो ओलंपिक का सिल्वर मेडल जीता था।
एक कठोर संदेश
अमन सहरावत का प्रतिबंध खेल में अनुशासन की अनिवार्यता को दर्शाता है। ओवरवेट के कारण उनका डिसक्वालिफिकेशन एक कठोर संदेश है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के लिए नियमों का पालन और प्रोफेशनलिज्म अत्यंत जरूरी है। हालांकि, उनके पेरिस ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन और ब्रॉन्ज मेडल जीतने की उपलब्धि भारतीय कुश्ती जगत के लिए गर्व का विषय बनी रहेगी।
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