ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर संसद में चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पेपर लीक, युवाओं के आंदोलन, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर, प्रधान को बचा लिया गया।" उनके इस बयान के बाद सदन के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई।
युवाओं के आंदोलन का किया जिक्र
अखिलेश यादव ने कहा कि वह लंबे समय से युवाओं के आंदोलन को देख रहे थे। उनके मुताबिक, शुरुआत में जिस आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया गया, वही बाद में इतना बड़ा हो गया कि सरकार को प्रदर्शन की अनुमति देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जब जनता एकजुट होकर अपनी बात मजबूती से रखती है तो सरकार को भी झुकना पड़ता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, "झुकाने वाला चाहिए, सरकार भी झुकती है।"
किसान आंदोलन का दिया उदाहरण
सपा प्रमुख ने अपने भाषण में किसान आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में किसानों को धरने पर बैठने की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन जब चुनाव करीब आए तो केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए। अखिलेश यादव ने इसे जनता की एकजुटता की ताकत बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनआंदोलन सरकारों को फैसले बदलने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
पेपर लीक और NTA पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में लगातार भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अब तक करीब 20 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब परीक्षा व्यवस्था में आउटसोर्सिंग बढ़ रही है तो जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने पूछा कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी होती है तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
आउटसोर्सिंग को लेकर सरकार पर निशाना
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि विपक्ष को चिंता है कि सरकार कहीं पूरे शासन तंत्र को ही आउटसोर्स न कर दे। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में बढ़ती आउटसोर्सिंग से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों प्रभावित हो रही हैं। उनका कहना था कि सरकार की नीतियों के कारण शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है और युवाओं का भरोसा भी डगमगा रहा है।
बीजेपी पर साधा राजनीतिक निशाना
अखिलेश यादव ने अपने भाषण में भारतीय जनता पार्टी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी चुनावी वादों के बजाय केवल "जुमले" देती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार युवाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।
बयान से तेज हुई राजनीतिक बहस
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान दिए गए अखिलेश यादव के बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे पहले से ही चर्चा में हैं। ऐसे में सपा प्रमुख की टिप्पणियों को विपक्ष के सरकार पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, इन आरोपों पर सरकार की प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है।
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