ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक साथ कई मुद्दे चर्चा में हैं। एक तरफ राज्यसभा चुनाव की तैयारी चल रही है, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का एक बयान चर्चा में आ गया है। उन्होंने अखिलेश यादव को लेकर कहा कि उनके बिना सब सूना है।
अखिलेश के बैठक में नहीं जाने से बढ़ी चर्चा
30 सितंबर को INDIA गठबंधन की एक अहम बैठक होनी थी। इस बैठक में चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों की आगे की रणनीति पर चर्चा होनी थी। लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बैठक में खुद शामिल नहीं होने का फैसला किया। पार्टी की तरफ से प्रतिनिधियों को भेजे जाने की बात सामने आई।
अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी को लेकर कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। खासकर इसलिए क्योंकि यूपी में सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अभी बातचीत का दौर चल रहा है। कांग्रेस की तरफ से उत्तर प्रदेश में ज्यादा सीटों की मांग की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि किसी नेता की गैरमौजूदगी को सीधे तौर पर किसी एक वजह से जोड़ना सही नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अखिलेश यादव ने अपनी दूसरी राजनीतिक व्यस्तताओं का भी हवाला दिया है। ऐसे में बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आ रहे हैं।
बृजभूषण सिंह ने क्या कहा?
इसी मुद्दे पर जब बृजभूषण शरण सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव INDIA गठबंधन की बैठक में नहीं आ रहे हैं तो इस पर वह क्या कह सकते हैं। इसके बाद जब उनसे कांग्रेस की ओर से यूपी में 150 सीटों की मांग को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि “अखिलेश यादव के बिना सब सूना है।” यह बयान इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि बृजभूषण सिंह और अखिलेश यादव अलग-अलग राजनीतिक खेमों में हैं। इसके बावजूद इस मौके पर बृजभूषण सिंह का बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव पर हमलावर नहीं था।
सपा-कांग्रेस के बीच सीटों का सवाल
उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस दोनों INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं। लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था। अब आगे की राजनीति में दोनों पार्टियों के बीच सीटों का तालमेल किस तरह बनता है, यह एक अहम सवाल बना हुआ है। सीट शेयरिंग में सिर्फ सीटों की संख्या ही नहीं, बल्कि कौन सी सीट किस पार्टी को मिलेगी, यह भी महत्वपूर्ण होता है। दोनों दलों के स्थानीय संगठन, उम्मीदवार और क्षेत्रीय समीकरण भी इस बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।
नेताओं के बयान क्यों बनते हैं चर्चा का विषय?
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में किसी भी बड़े नेता का बयान तुरंत राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन जाता है। बृजभूषण सिंह के इस बयान के साथ भी यही हुआ। एक तरफ सपा-कांग्रेस की बातचीत चल रही है और दूसरी तरफ अखिलेश यादव की INDIA बैठक से दूरी ने सवाल बढ़ा दिए हैं। फिलहाल सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों पार्टियों के बीच आगे क्या समझौता होगा। इतना जरूर है कि अखिलेश यादव की भूमिका यूपी की विपक्षी राजनीति में महत्वपूर्ण बनी हुई है और उनके हर बड़े राजनीतिक फैसले पर नजर रहेगी।
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