ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में कुल 65 नेताओं को जगह मिली है। इस लिस्ट में दो मुस्लिम चेहरे भी शामिल हैं। लेकिन अब मुस्लिम और दलित प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। AIMIM के प्रवक्ता शादाब चौहान ने बीजेपी की नई टीम पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी लगातार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करती है, लेकिन पार्टी की नई टीम में क्या सभी वर्गों को उनकी आबादी और जरूरत के हिसाब से पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है?
शादाब चौहान ने क्या कहा?
AIMIM नेता शादाब चौहान ने कहा कि उनकी पार्टी को बीजेपी से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है। बीजेपी उनकी अपनी पार्टी है और वह अपने हिसाब से संगठन तैयार कर सकती है। लेकिन उनका सवाल बीजेपी के उस दावे को लेकर है, जिसमें पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात करती है। शादाब चौहान के मुताबिक, अगर बीजेपी सबका साथ और सबका विकास की बात करती है, तो उसकी राष्ट्रीय टीम में भी अलग-अलग वर्गों को पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी साफ किया कि AIMIM आगे भी बीजेपी की नीतियों का विरोध करती रहेगी।
बीजेपी की नई टीम में यूपी का खास ध्यान
बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से 8 नेताओं को जगह मिली है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए इन नियुक्तियों को काफी अहम माना जा रहा है। पार्टी ने यूपी से अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। इनमें दलित, ओबीसी, ब्राह्मण, यादव और मुस्लिम समाज से जुड़े चेहरे शामिल हैं। इसी वजह से राजनीतिक जानकार इन नियुक्तियों को यूपी के जातीय और सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।
दलित वोटरों पर बीजेपी का फोकस
बुलंदशहर से लगातार तीन बार सांसद रहे डॉ. भोला सिंह को भी बीजेपी की नई टीम में राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है। भोला सिंह अनुसूचित जाति यानी SC समाज से आते हैं। वह पहले बीजेपी के अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनकी नई जिम्मेदारी को यूपी में दलित वोटरों तक बीजेपी की पहुंच मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
मुस्लिम समाज से तारिक मंसूर को जिम्मेदारी
बीजेपी की नई टीम में मुस्लिम समाज से जुड़े प्रोफेसर तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। तारिक मंसूर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति रह चुके हैं। बीजेपी में उन्हें पहले भी संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रही हैं। इसके अलावा यूपी से कुंवर बासित अली को भी अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है। यानी बीजेपी की नई टीम में मुस्लिम समाज से दो प्रमुख चेहरे शामिल हैं।
क्या 2027 के लिए बन रहा है नया समीकरण?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में बीजेपी की नई टीम में अलग-अलग वर्गों को दी गई जिम्मेदारियां काफी मायने रखती हैं। एक तरफ समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण पर जोर दे रहे हैं। वहीं बीजेपी भी अपनी टीम में अलग-अलग सामाजिक समूहों को जगह देकर अपना आधार मजबूत करने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।
अब विपक्ष बीजेपी की नई टीम में प्रतिनिधित्व के मुद्दे को कितना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाता है और बीजेपी इसका क्या जवाब देती है, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी। फिलहाल इतना साफ है कि बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम सिर्फ संगठन में बदलाव नहीं है, बल्कि 2027 के यूपी चुनाव को ध्यान में रखते हुए बनाई गई रणनीति का एक हिस्सा भी मानी जा रही है।
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