ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल धीरे-धीरे तेज होती जा रही है। चुनाव में अभी कुछ समय बाकी है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। बीजेपी ने भी अब अपनी नजर सीधे बूथ स्तर पर लगा दी है। पार्टी ने उन बूथों की पहचान की है, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे जीत मिली थी, लेकिन दो साल बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में वहां तस्वीर बदल गई। पार्टी के लिए ये बूथ इसलिए अहम हैं क्योंकि यहां वोटरों का रुझान बहुत कम समय में बदला है। अब बीजेपी इसी बदलाव को समझने और अपनी पुरानी पकड़ वापस मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
करीब 19 हजार बूथों पर खास नजर
बीजेपी के आंतरिक चुनावी आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में करीब 18,900 ऐसे बूथ हैं, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत मिली थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा। अब पार्टी इन बूथों को अपनी अगली चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है। इसके लिए पिछले दो चुनावों के आंकड़ों को आपस में मिलाकर देखा गया है। पार्टी यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर किन इलाकों में वोटरों का मूड बदला और इसके पीछे स्थानीय स्तर पर क्या कारण रहे। यानी इस बार सिर्फ बड़े नेताओं की रैलियों पर जोर नहीं रहेगा। पार्टी का ध्यान उस छोटे से इलाके तक पहुंचने पर है, जहां कुछ हजार वोट भी चुनाव का पूरा नतीजा बदल सकते हैं।
ग्रामीण इलाकों की चिंता ज्यादा
आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण इलाकों में हुआ। 2024 के लोकसभा चुनाव में जिन बूथों पर पार्टी को नुकसान हुआ, उनमें करीब 80 फीसदी बूथ ग्रामीण क्षेत्रों में बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि अब गांवों में संगठन को मजबूत करना बीजेपी की बड़ी प्राथमिकता बन गया है। पार्टी यह जानने की कोशिश कर रही है कि ग्रामीण वोटरों के बीच किन मुद्दों ने असर डाला और कहां संगठन की पकड़ कमजोर हुई। अवध और पूर्वांचल के इलाके पार्टी के लिए खास चुनौती बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 2024 में बीजेपी को कई जगहों पर बड़ा नुकसान हुआ था।
अवध और पूर्वांचल पर खास ध्यान
अवध क्षेत्र में 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बड़ी संख्या में सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी, फैजाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर जैसे इलाकों में पार्टी को कई बूथों पर नुकसान उठाना पड़ा। पूर्वांचल में भी कुछ ऐसा ही बदलाव देखने को मिला। 2022 में बीजेपी ने इस क्षेत्र में कई विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 2024 में जौनपुर, गाजीपुर, मछलीशहर, चंदौली और प्रयागराज ग्रामीण जैसे इलाकों में पार्टी को बूथ स्तर पर झटका लगा। इन इलाकों में अब बीजेपी संगठन के जरिए अपनी स्थिति को दोबारा मजबूत करने की कोशिश करेगी।
पश्चिमी यूपी में भी कम नहीं हुई चुनौती
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड में भी बीजेपी को नुकसान हुआ, हालांकि अवध और पूर्वांचल की तुलना में यह कम रहा। 2022 में इन क्षेत्रों में पार्टी ने 128 विधानसभा सीटों में से 87 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के वोटों को विधानसभा स्तर पर देखा जाए तो पार्टी करीब 65 सीटों पर ही आगे रही। इसका मतलब साफ है कि यहां भी पार्टी को अपनी पुरानी बढ़त वापस हासिल करने के लिए मेहनत करनी होगी। बुंदेलखंड में भी इसी तरह का बदलाव दिखाई दिया। 2022 में बीजेपी ने 19 में से 14 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव के वोटों के आधार पर पार्टी सिर्फ 9 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही।
बड़े नेताओं के दौरे भी बढ़ेंगे
बूथ स्तर की इस तैयारी के साथ पार्टी के बड़े संगठनात्मक नेताओं के दौरे भी बढ़ रहे हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष 11 सितंबर से उत्तर प्रदेश के तीन दिन के दौरे पर हैं। इस दौरान लखनऊ और कानपुर समेत कई क्षेत्रों के नेताओं के साथ बैठक कर संगठन को मजबूत करने पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े भी कई जिलों का दौरा करेंगे। इन बैठकों में कमजोर बूथों की स्थिति पर चर्चा होगी और यह समझने की कोशिश होगी कि वहां पार्टी को किन वजहों से नुकसान हुआ।
2024 के झटके से सबक लेने की कोशिश
2024 का लोकसभा चुनाव बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश में उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। पार्टी को प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 33 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतकर बड़ा उलटफेर किया था। अब विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी उसी अनुभव से सबक लेने की कोशिश कर रही है। पार्टी का पूरा जोर इस बात पर है कि लोकसभा चुनाव में जिन इलाकों में उसका वोट खिसका, वहां दोबारा संगठन और वोटरों के बीच मजबूत संपर्क बनाया जाए।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि करीब 19 हजार कमजोर बूथों पर बनाई गई यह रणनीति जमीन पर कितना असर डालती है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनावी जीत सिर्फ बड़े चेहरों से तय नहीं होती। कई बार एक बूथ का छोटा सा बदलाव भी पूरे विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर बदल देता है। बीजेपी अब इसी स्तर पर अपनी तैयारी को मजबूत करने में जुटी है।
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