ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने धनराज नथवानी को उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक चर्चा बढ़ा दी है। नथवानी का नाम राजनीति के साथ-साथ कॉरपोरेट और सामाजिक क्षेत्र में भी जाना जाता है। उनकी उम्मीदवारी ऐसे समय सामने आई है जब उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी गणित पर सभी दलों की नजर है।
कौन हैं धनराज नथवानी?
धनराज नथवानी, राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी के बेटे हैं। उनका जुड़ाव कॉरपोरेट क्षेत्र के साथ रहा है और वह रिलायंस से जुड़े कई कामों में जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उनका संबंध गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन से भी है, जहां वह अध्यक्ष के पद पर हैं। इसके अलावा वह मंदिर प्रशासन, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े संस्थानों के साथ भी काम कर चुके हैं। यानी उनकी पहचान सिर्फ राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रही है। कॉरपोरेट, खेल, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उनकी मौजूदगी रही है।
सपा ने क्यों बनाया उम्मीदवार?
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए प्रोफेसर रामगोपाल यादव के साथ धनराज नथवानी का नाम सामने रखा है। नथवानी का चयन इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनका राजनीतिक बैकग्राउंड पारंपरिक पार्टी राजनीति से अलग रहा है। उनके पिता परिमल नथवानी लंबे समय से राज्यसभा में हैं और रिलायंस समूह से उनका जुड़ाव रहा है। ऐसे में धनराज नथवानी की उम्मीदवारी ने यूपी की राजनीति में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है।
यूपी की राज्यसभा गणित क्या है?
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है। मौजूदा राजनीतिक ताकत के हिसाब से अलग-अलग दल अपने उम्मीदवारों की जीत के लिए विधायकों के समर्थन का हिसाब लगा रहे हैं। राज्यसभा चुनाव में विधानसभा के निर्वाचित सदस्य वोट करते हैं। ऐसे में उम्मीदवारों की जीत के लिए दलों को उपलब्ध विधायकों की संख्या और वोटों का गणित समझना पड़ता है।
इसी वजह से नथवानी की एंट्री को भी सिर्फ एक उम्मीदवार की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा रहा। उनकी उम्मीदवारी के बाद संभावित क्रॉस-वोटिंग और अलग-अलग दलों के बीच समर्थन के गणित को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि वास्तविक नतीजा मतदान और आधिकारिक परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा।
सपा के लिए कितना अहम है चुनाव?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव हमेशा से विधानसभा की संख्या और राजनीतिक सहयोग के हिसाब से महत्वपूर्ण रहे हैं। सपा की ओर से नथवानी का नाम सामने आने के बाद पार्टी के चुनावी प्रबंधन पर भी नजर रहेगी। राजनीतिक विश्लेषण में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सपा अपनी मौजूदा ताकत के साथ उम्मीदवारों को आसानी से जिता पाएगी या दूसरे दलों के विधायकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
क्रॉस-वोटिंग की चर्चा क्यों?
राज्यसभा चुनावों में कई बार विधायकों के व्यक्तिगत फैसले और पार्टी लाइन से अलग मतदान की घटनाएं देखने को मिली हैं। इसी कारण उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही क्रॉस-वोटिंग की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो जाती है। हालांकि किसी खास विधायक के क्रॉस-वोट करने का अनुमान लगाना अभी जल्दबाजी होगी। चुनाव की तस्वीर नामांकन, समर्थन और मतदान के बाद ही साफ होगी। फिलहाल धनराज नथवानी की एंट्री ने उत्तर प्रदेश की राज्यसभा राजनीति में एक नया नाम जरूर जोड़ दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मतदान के दिन कौन सा दल किसे समर्थन देता है और विधानसभा में मौजूद वोटों का वास्तविक गणित क्या तस्वीर बनाता है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!