ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
वाराणसी को लेकर देश ही नहीं, विदेशों में रहने वाले लोगों की भी अपनी अलग आस्था है। अब अमेरिका से भारत पहुंचे जैक्सन की कहानी सामने आई है। जैक्सन अपने चाचा की अस्थियां लेकर काशी पहुंचे, जहां उन्होंने अस्सी घाट पर धार्मिक विधि से पिंडदान और अस्थि विसर्जन किया। जैक्सन के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं थी, बल्कि अपने चाचा के प्रति आखिरी जिम्मेदारी निभाने का एक भावुक पल था। उन्होंने बताया कि चाचा के निधन के बाद उनकी याद उन्हें लगातार परेशान कर रही थी। यहां तक कि वह उन्हें सपनों में भी देखते थे।
2 अक्टूबर को भारत पहुंचे
जानकारी के मुताबिक, जैक्सन ने अपने चाचा की अंतिम इच्छा और आत्मा की शांति के लिए काशी आने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने अमेरिका से यात्रा की और 2 अक्टूबर को भारत पहुंचे। भारत आने के बाद उनका अगला पड़ाव वाराणसी था। काशी पहुंचने के बाद उन्होंने अस्सी घाट का रुख किया। घाट पर पुरोहितों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से कार्यक्रम कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पहले धार्मिक प्रक्रिया पूरी की गई और इसके बाद गंगा में अस्थियों का विसर्जन किया गया।
गंगा में किया अस्थि विसर्जन
अस्थि विसर्जन के दौरान जैक्सन काफी भावुक नजर आए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, काशी और गंगा में अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्मों को विशेष महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी लोग अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों की अस्थियां लेकर यहां पहुंचते हैं।जैक्सन ने भी अपने चाचा की याद में यही रास्ता चुना। अस्सी घाट पर तीर्थ पुरोहित की देखरेख में पिंडदान की प्रक्रिया पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने गंगा की धारा में अस्थियां प्रवाहित कीं।
रिश्ते और आस्था की भावुक कहानी
जैक्सन की कहानी इस बात को भी दिखाती है कि दूरी चाहे कितनी भी हो, परिवार से जुड़ी भावनाएं इंसान को वापस अपनी जड़ों तक ले आती हैं। अमेरिका में रहने के बावजूद उन्होंने अपने चाचा के निधन के बाद काशी आने का फैसला किया। उनके लिए यह सफर हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने से कहीं ज्यादा था। वह अपने चाचा के लिए कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिससे उन्हें मन की शांति मिल सके।
काशी में पिंडदान और अस्थि विसर्जन के बाद जैक्सन ने धार्मिक प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान घाट पर मौजूद लोगों का भी ध्यान उनकी कहानी की तरफ गया।काशी हमेशा से देश-दुनिया के लोगों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र रही है। जैक्सन का यह सफर भी इसी परंपरा की एक अलग तस्वीर सामने लाता है, जहां परिवार की याद, भावनाएं और धार्मिक विश्वास एक साथ दिखाई देते हैं।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!