ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मदरसों को आतंकवाद का अड्डा बताना न केवल गलत है, बल्कि यह सांप्रदायिक सोच को बढ़ावा देने वाला बयान भी है। मौलाना मदनी ने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसा बयान देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाता है और देश की सामाजिक एकता प्रभावित होती है।
'संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है बयान'
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का ऐसा बयान उस पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार, भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और सभी धर्मों एवं उनकी शैक्षिक संस्थाओं का सम्मान करने की बात करता है। उन्होंने कहा कि मदरसों को आतंकवाद से जोड़ना उन लाखों छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों का अपमान है, जो वर्षों से इन संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर समाज की सेवा कर रहे हैं।
'मदरसों ने आजादी की लड़ाई में निभाई अहम भूमिका'
मौलाना मदनी ने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में मदरसों और उलेमा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने दावा किया कि जब अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष चल रहा था, तब दारुल उलूम देवबंद और उससे जुड़े कई उलेमा ने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि अनेक धार्मिक विद्वानों ने जेल की सजा झेली, फांसी का सामना किया और देश निकाला भी सहा, लेकिन उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के सामने कभी समझौता नहीं किया।
इतिहास का भी किया जिक्र
अपने बयान में मौलाना मदनी ने कहा कि जिन मदरसों पर आज सवाल उठाए जा रहे हैं, उन्हीं संस्थानों से निकले उलेमा ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इतिहास में ऐसे दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें कुछ नेताओं द्वारा ब्रिटिश सरकार से दया याचिका देने का उल्लेख मिलता है। हालांकि, उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम लिए बिना कहा कि इतिहास के तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और आजादी की लड़ाई में मदरसों की भूमिका को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
समाज में भाईचारा बनाए रखने की अपील
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि धार्मिक और शैक्षिक संस्थानों को राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इस तरह के बयान समाज में अविश्वास और नफरत का माहौल पैदा कर सकते हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे ऐसे बयान देने से बचें, जो समाज में विभाजन की स्थिति पैदा करें। उनके अनुसार, देश की विविधता और भाईचारा ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है और इसे बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
बढ़ी राजनीतिक हलचल
केशव प्रसाद मौर्य के बयान और उस पर मौलाना अरशद मदनी की प्रतिक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है। यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान, धार्मिक शिक्षा और आजादी के इतिहास जैसे विषयों को भी चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की ओर से और भी प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
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