ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद स्कूलों में हिजाब और यूनिफॉर्म को लेकर बहस तेज हो गई है। हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम छात्रा की स्कूल ड्रेस के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया। फैसले के बाद इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने इस तरह के विवादों को ज्यादा तूल देने के बजाय स्थानीय स्तर पर बातचीत और आपसी समझ से हल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की अस्मिता, सम्मान और आत्म-सम्मान से जुड़े मामलों को संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए।
स्कूल यूनिफॉर्म और हिजाब पर क्या बोलीं मायावती?
मायावती ने कहा कि स्कूलों में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर या हिजाब पहनने जैसे मामलों को अनावश्यक रूप से कोर्ट-कचहरी तक ले जाने के बजाय स्कूल प्रबंधन और शासन-प्रशासन को मिलकर समाधान निकालना चाहिए। उनके मुताबिक, आपसी समझ और सूझबूझ से ऐसे मामलों को सुलझाया जा सकता है। इससे विवाद बढ़ने से भी रोका जा सकेगा और किसी राजनीतिक दल को धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करने का मौका नहीं मिलेगा। मायावती ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे मामलों में सभी पक्षों को संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करना चाहिए।
धार्मिक मामलों पर टिप्पणी से बचने की अपील
बसपा प्रमुख ने लोगों से धर्म, धार्मिक ग्रंथों और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्मों की मान्यताओं और भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। मायावती ने संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने ऐसा संविधान दिया, जिसमें सभी जाति और धर्म के लोगों को समान अधिकार मिले हैं। उनके मुताबिक, भारत के संविधान में सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शांतिपूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि देश में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए जरूरी है कि लोग एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं और मान्यताओं का सम्मान करें।
बसपा की विचारधारा का भी किया जिक्र
मायावती ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी सभी समाजों के सम्मान और सुरक्षा में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि बसपा अंबेडकरवादी विचारधारा वाली पार्टी है और सभी लोगों के जान-माल तथा धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा की पक्षधर है। उन्होंने लोगों से अपील की कि धार्मिक मामलों को लेकर ऐसे बयान देने से बचें, जिससे किसी समुदाय की भावनाएं आहत हों या समाज में तनाव पैदा हो।
बदायूं में अंबेडकर प्रतिमा विवाद पर चिंता
हिजाब विवाद के साथ मायावती ने उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर चल रहे विवाद पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में तनाव को देखते हुए शासन और प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। बसपा प्रमुख ने मांग की कि बदायूं में अंबेडकर प्रतिमा से जुड़े विवाद का शांतिपूर्ण और उचित समाधान निकाला जाए। उन्होंने प्रशासन से ऐसा कदम उठाने की अपील की, जिससे इलाके में तनाव कम हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
कुल मिलाकर, हिजाब विवाद पर मायावती ने कानूनी लड़ाई और राजनीतिक बयानबाजी के बजाय स्थानीय स्तर पर बातचीत और आपसी सहमति को बेहतर रास्ता बताया है। साथ ही उन्होंने धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में संयम बरतने और एक-दूसरे की मान्यताओं का सम्मान करने की अपील की है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!