ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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देश में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। छोटी दुकान से लेकर बड़े बाजार तक आज लोग कैश की जगह UPI से भुगतान करना पसंद करते हैं। ऐसे में UPI Payment Charges को लेकर सामने आई चर्चा ने आम लोगों के साथ-साथ राजनीतिक दलों का भी ध्यान खींचा है। इसी मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। मायावती ने कहा कि UPI के जरिए होने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाने का सीधा असर आम जनता पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि सरकार ने पहले डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया और अब इसी लेनदेन पर शुल्क की व्यवस्था लाई जा रही है। उनके मुताबिक इसका अंतिम बोझ किसी न किसी रूप में आम आदमी की जेब पर ही आ सकता है।
'जेब तो आम आदमी की ही कटेगी'
मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से जनता में परेशानी और नाराजगी बढ़ सकती है। उनका तर्क है कि चाहे इस रकम को टैक्स कहा जाए या किसी और नाम से, अगर डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त खर्च आता है तो उसका असर आम लोगों पर पड़ना तय है।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में UPI रोजमर्रा की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुका है। सब्जी वाले से लेकर ऑनलाइन खरीदारी तक, कई जगहों पर लोग कुछ सेकंड में मोबाइल से भुगतान कर देते हैं। ऐसे में किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क सीधे ग्राहक और छोटे कारोबारियों की चिंता बढ़ा सकता है। मायावती ने अपने बयान में देश की आर्थिक स्थिति और आम लोगों की परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग महंगाई, बेरोजगारी और दूसरी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में सरकार की नीतियों में आम जनता की सुविधा और राहत को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सरकार की नीतियों पर मायावती का सवाल
मायावती ने कहा कि सरकार की योजनाओं का मकसद सिर्फ कमाई करना नहीं, बल्कि लोगों की मुश्किलों को कम करना भी होना चाहिए। उनके मुताबिक जब परिवार पहले से ही रोजमर्रा के खर्च को लेकर परेशान हैं, तब उनके ऊपर किसी भी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ चिंता की बात हो सकता है। हालांकि UPI Payment Charges को लेकर पूरी बहस सिर्फ राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं है। डिजिटल पेमेंट सिस्टम में बैंकों, पेमेंट कंपनियों और कारोबारियों की अपनी लागत होती है। ऐसे में शुल्क से जुड़ी किसी भी व्यवस्था का असर किस पर और कितना पड़ेगा, यह उसके नियमों और लागू होने के तरीके पर निर्भर करेगा।
स्मार्ट स्कूल योजना पर भी सवाल
मायावती ने सिर्फ UPI चार्ज का मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में स्मार्ट स्कूल बनाने की योजना को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। सरकार ने प्रदेश के करीब 14,500 स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की है। मायावती ने इस कदम को अच्छा बताते हुए कहा कि स्मार्ट पढ़ाई से पहले स्कूलों में जरूरी बुनियादी सुविधाएं होना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने स्कूलों में छत, बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल का मैदान और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं का मुद्दा उठाया।
पहले बुनियादी सुविधाएं या स्मार्ट सुविधाएं?
यूपी के सरकारी स्कूलों को लेकर यह बहस पहले भी होती रही है कि तकनीक बढ़ाने के साथ-साथ स्कूलों की मूल जरूरतों पर कितना ध्यान दिया जा रहा है। मायावती ने इसी बात को लेकर सवाल किया कि क्या हर स्कूल पर तय बजट में स्मार्ट सुविधाओं के साथ बाकी जरूरी इंतजाम भी ठीक तरह से किए जा सकेंगे।
फिलहाल UPI Payment Charges और यूपी के स्मार्ट स्कूलों को लेकर मायावती की प्रतिक्रिया राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गई है। एक तरफ डिजिटल भुगतान की लागत और शुल्क का सवाल है, तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में तकनीक के साथ बुनियादी सुविधाओं को लेकर बहस है। आने वाले समय में इन दोनों मुद्दों पर सरकार की ओर से क्या जवाब आता है, इस पर भी नजर रहेगी
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