ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट लगातार मंदिर की व्यवस्थाओं में बदलाव कर रहा है। इसी कड़ी में ट्रस्ट ने मंदिर की व्यवस्था से जुड़े दो कर्मचारियों को हटा दिया है। यह कार्रवाई मंदिर में तैनात एक महिला क्षेत्राधिकारी की शिकायत के बाद की गई है।
दो कर्मचारियों को मंदिर व्यवस्था से हटाया
जानकारी के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने केडी तिवारी उर्फ ‘बड़े बाबू’ और बजरंग पाठक को राम मंदिर की व्यवस्था से अलग कर दिया है। दोनों लंबे समय से मंदिर से जुड़ी अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। केडी तिवारी रामलला के आभूषणों और श्रद्धालुओं की ओर से मंदिर में चढ़ाए जाने वाले कीमती सामान का हिसाब-किताब रखने का काम देखते थे। वहीं, बजरंग पाठक की जिम्मेदारी मंदिर आने वाले वीआईपी श्रद्धालुओं को प्रसाद, अंगवस्त्र और दूसरी भेंट उपलब्ध कराने की व्यवस्था से जुड़ी थी।
महिला क्षेत्राधिकारी की शिकायत के बाद कार्रवाई
बताया जा रहा है कि मंदिर में तैनात महिला क्षेत्राधिकारी और बजरंग पाठक के बीच कुछ अतिथियों के दर्शन के दौरान प्रसाद और दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद महिला क्षेत्राधिकारी ने मामले की शिकायत ट्रस्ट के अधिकारियों से की। शिकायत मिलने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने दोनों कर्मचारियों को नोटिस जारी किया। इसके बाद ट्रस्ट ने दोनों को मंदिर की व्यवस्था से हटाने का फैसला लिया।
18 अगस्त से मंदिर में एंट्री पर रोक
ट्रस्ट के फैसले के बाद 18 अगस्त 2026 से केडी तिवारी और बजरंग पाठक की राम मंदिर परिसर में एंट्री पर रोक लगा दी गई है। दोनों को अब बाग बिजैसी स्थित ‘तीर्थ क्षेत्र पुरम’ भेज दिया गया है। हालांकि, दोनों के खिलाफ कार्रवाई का मुख्य कारण महिला क्षेत्राधिकारी की शिकायत और उससे जुड़ा विवाद बताया जा रहा है। इस मामले में आगे ट्रस्ट की ओर से क्या फैसला लिया जाता है, यह देखना बाकी है।
चढ़ावा चोरी के बाद लगातार हो रहे बदलाव
राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान से जुड़ा मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है। श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए जाने वाले आभूषण और दूसरी मूल्यवान वस्तुओं के हिसाब-किताब को लेकर भी सवाल उठे हैं। ऐसे में ट्रस्ट की कोशिश है कि मंदिर की व्यवस्थाओं में ज्यादा पारदर्शिता लाई जाए और श्रद्धालुओं के बीच भरोसा बना रहे। कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव और निगरानी बढ़ाने जैसे कदम इसी दिशा में देखे जा रहे हैं।
राम मंदिर के पहले CEO पर भी फैसला जल्द
इसी बीच राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति को लेकर भी प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंचने की जानकारी सामने आई है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस संबंध में बड़ा फैसला लिया जा सकता है। राम मंदिर में लगातार हो रहे प्रशासनिक बदलावों के बीच अब सबकी नजर ट्रस्ट के अगले फैसलों पर है। खास तौर पर मंदिर की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर आने वाले दिनों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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