ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पाल सिंह अम्मू ने राज्य की 50 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की बात कही है। अम्मू के इस बयान के बाद यूपी की चुनावी राजनीति में एक नया नाम और नया राजनीतिक समीकरण चर्चा में आ गया है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इन सीटों की सूची क्या होगी और उम्मीदवारों का चयन किस आधार पर किया जाएगा।
अम्मू ने क्या कहा?
लखनऊ में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में सूरज पाल सिंह अम्मू ने कहा कि वह खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन उनकी पार्टी के युवा उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेंगे। उन्होंने 50 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की बात कही। अम्मू पहले भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं, लेकिन अब वह करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे में उनके बयान को केवल एक सामान्य चुनावी घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। चुनाव से पहले अलग-अलग संगठन और छोटे राजनीतिक समूह अपने प्रभाव वाले इलाकों में सक्रिय होने लगते हैं और उम्मीदवार उतारने की तैयारी करते हैं।
जाति और धर्म की राजनीति पर भी बयान
अम्मू ने बातचीत के दौरान कहा कि राजनीतिक दलों को लोगों को जाति और धर्म के आधार पर बांटने से बचना चाहिए। उन्होंने आर्थिक स्थिति को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि समाज में अमीर और गरीब के बीच का फर्क बड़ा मुद्दा है। उन्होंने जातिगत जनगणना की जगह आर्थिक आधार पर जनगणना की बात भी कही। इस मुद्दे पर उनकी राय दूसरे राजनीतिक दलों की मांगों से अलग दिखाई देती है। हालांकि यह उनका व्यक्तिगत और संगठनात्मक राजनीतिक रुख है, जिसे चुनावी नीति के रूप में लागू करने की स्थिति अभी सामने नहीं आई है।
युवाओं पर अम्मू का फोकस
अम्मू ने देश की आबादी में युवाओं की बड़ी हिस्सेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि युवा सरकारों से परेशान हैं और अब बदलाव चाहते हैं। उन्होंने कई युवा चेहरों का नाम भी लिया और कहा कि नई पीढ़ी को राजनीति में आगे आना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब 2027 के यूपी चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल अपनी तैयारियों को धीरे-धीरे आगे बढ़ा रहे हैं। युवाओं की भागीदारी, रोजगार, शिक्षा और सरकारी नीतियां आने वाले चुनाव में चर्चा के अहम मुद्दे हो सकते हैं।
क्या किसी पार्टी के साथ गठबंधन होगा?
जब अम्मू से पूछा गया कि करणी सेना किसी राजनीतिक दल को समर्थन देगी या नहीं, तो उन्होंने कहा कि इस पर अभी विचार किया जा रहा है। यानी फिलहाल किसी पार्टी के साथ समर्थन या गठबंधन की अंतिम घोषणा नहीं हुई है। 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक दावा है, लेकिन इसका वास्तविक असर उम्मीदवारों की घोषणा और चुनावी मैदान में संगठन की मौजूदगी के बाद ही समझा जा सकेगा।
फिलहाल इतना जरूर है कि सूरज पाल सिंह अम्मू ने यूपी की राजनीति में करणी सेना की चुनावी भूमिका को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। अब देखना होगा कि 50 सीटों का यह प्लान आगे कितनी सीटों पर उम्मीदवारों की वास्तविक घोषणा तक पहुंचता है और संगठन किन इलाकों को अपने लिए चुनता है।
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