ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। NDA के अंदर सीट बंटवारे को लेकर बातचीत की खबरों के बीच लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास यानी LJP(R) की भूमिका भी चर्चा में है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के हवाले से करीब 10 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की संभावना बताई गई है। हालांकि अभी तक सीटों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
दलित वोटरों पर नजर
चिराग पासवान की पार्टी उत्तर प्रदेश में खास तौर पर दलित और युवा वोटरों के बीच अपना संगठन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के नेता पिछले कुछ समय से यूपी के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम कर रहे हैं। चिराग पासवान खुद भी उत्तर प्रदेश में कई दौरे कर चुके हैं। प्रयागराज में उनका कार्यक्रम भी प्रस्तावित था। पार्टी का लक्ष्य संगठन को चुनाव से पहले मजबूत करना और अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाना है।
पहले 403 सीटों की बात
चिराग पासवान ने पहले उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात भी कही थी। हालांकि अब NDA के साथ सीट बंटवारे की चर्चा के बीच पार्टी की रणनीति गठबंधन के तहत सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने की दिशा में जाती दिखाई दे रही है। यह बदलाव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यूपी में चुनाव लड़ने के लिए सिर्फ संगठन ही नहीं, बल्कि सीटों का चुनाव और स्थानीय सामाजिक समीकरण भी अहम होते हैं।
NDA में सहयोगियों की भूमिका
उत्तर प्रदेश में बीजेपी के अलावा NDA में कई सहयोगी दल हैं। अलग-अलग क्षेत्र और सामाजिक समूहों में इन दलों की अपनी राजनीतिक मौजूदगी है। ऐसे में सीट बंटवारे के दौरान हर सहयोगी की भूमिका और उसकी मांग महत्वपूर्ण हो सकती है। LJP(R) की नजर गैर-जाटव दलित वोटरों पर होने की बात सामने आई है। राज्य में दलित राजनीति पहले से ही कई राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में चिराग की पार्टी की एंट्री चुनावी समीकरण में एक नया पहलू जोड़ सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल सीटों की अंतिम संख्या और उम्मीदवारों को लेकर है। जब तक NDA की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक सामने आ रही संख्या को संभावित फॉर्मूले के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!