ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को चुनाव होना है। इनमें नौ सीटों का कार्यकाल खत्म होने वाला है, जबकि एक सीट पहले ही खाली हो चुकी है। ऐसे में विधानसभा में मौजूद संख्या के आधार पर पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए गणित बैठाने में जुट गई हैं।
पहली नजर में भाजपा और उसके सहयोगियों की स्थिति मजबूत दिखाई देती है, लेकिन चर्चा खास तौर पर दसवीं सीट के गणित को लेकर है।
विधानसभा में कितने विधायक?
मौजूदा विधानसभा में 397 विधायक हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा के पास 259 विधायक हैं और सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए की संख्या करीब 295 तक पहुंचती है।
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं। अपना दल सोनेलाल के 13, राष्ट्रीय लोकदल के 9, सुभासपा के 6, निषाद पार्टी के 5 और कांग्रेस के 2 विधायक बताए गए हैं। इसके अलावा जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2 और कुछ असंबद्ध विधायक भी हैं।
सुभासपा क्यों चर्चा में?
सुभासपा के पास सिर्फ छह विधायक हैं, लेकिन राज्यसभा चुनाव में कभी-कभी कम संख्या वाले दल भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। खासकर तब जब किसी सीट के लिए संख्या का अंतर कम हो।
ओम प्रकाश राजभर की पार्टी फिलहाल भाजपा के साथ है। लेकिन पार्टी के कुछ विधायकों की राजनीतिक नजदीकियों को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। इसी वजह से दसवीं सीट के संभावित गणित में सुभासपा की भूमिका पर नजर रखी जा रही है।
राज्यसभा का चुनाव अलग क्यों?
लोकसभा या विधानसभा चुनाव में जनता सीधे मतदान करती है, लेकिन राज्यसभा चुनाव में विधायक वोट देते हैं। इसलिए यहां सीटों का पूरा गणित विधानसभा की मौजूदा संख्या पर निर्भर करता है।
अगर किसी गठबंधन के पास पर्याप्त विधायक हैं तो सीट जीतने की स्थिति मजबूत हो जाती है। लेकिन आखिरी सीट के लिए अगर संख्या करीब हो तो छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसी वजह से चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपने-अपने सहयोगियों के साथ बातचीत करते हैं।
सपा-कांग्रेस का समीकरण
समाजवादी पार्टी के 101 और कांग्रेस के 2 विधायक हैं। दोनों दलों के बीच समर्थन का सवाल राज्यसभा चुनाव में भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि अंतिम तस्वीर सिर्फ संख्या से तय नहीं होगी। उम्मीदवार कौन होंगे, किसे पार्टी का आधिकारिक समर्थन मिलेगा और मतदान के समय विधायक किस तरह वोट करेंगे, इन सबका असर पड़ेगा।
क्या दसवीं सीट पर पेंच फंस सकता है?
मौजूदा विधानसभा संख्या भाजपा और उसके सहयोगियों को मजबूत स्थिति देती है। लेकिन दसवीं सीट को लेकर चर्चा इसलिए है क्योंकि यहां छोटे दलों की भूमिका पर भी नजर है।
राज्यसभा चुनाव से पहले उम्मीदवारों की घोषणा और पार्टियों की रणनीति तस्वीर को ज्यादा साफ करेगी। फिलहाल इतना जरूर है कि यूपी का यह चुनाव अगले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन सकता है।
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