ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राज्य के सभी 762 नगरीय निकायों में लंबे समय से लंबित संपत्ति कर यानी गृहकर, जलकर और सीवरकर की वसूली के लिए एकमुश्त समाधान योजना (OTS) लागू करने का फैसला किया है। इस योजना से पुराने कर बकाये में फंसे लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
762 नगरीय निकायों में लागू होगी योजना
सरकार की यह योजना प्रदेश के सभी 762 नगरीय निकायों में लागू होगी। इनमें 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद और 545 नगर पंचायतें शामिल हैं। इसका उद्देश्य पुराने कर बकायों का आसान तरीके से निस्तारण करना है। सरकार का मानना है कि लंबे समय से बकाया संपत्ति कर की वजह से जहां करदाताओं पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा था, वहीं नगरीय निकायों की आय भी प्रभावित हो रही थी। OTS के जरिए दोनों समस्याओं का समाधान करने की कोशिश की जा रही है।
15 अगस्त से 15 दिसंबर तक चलेगी OTS योजना
एकमुश्त समाधान योजना की शुरुआत 15 अगस्त 2026 से होगी और यह 15 दिसंबर 2026 तक चलेगी। यानी करदाताओं को अपने पुराने बकाये का निपटारा करने के लिए करीब चार महीने का समय मिलेगा। योजना के शुरुआती चरण में 15 अगस्त से 14 सितंबर के बीच नगरीय निकायों की ओर से करदाताओं और अन्य संबंधित लोगों को योजना की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा पात्र लोग इसका लाभ उठा सकें।
तीन किस्तों में जमा कर सकेंगे बकाया
सरकार ने करदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बकाया संपत्ति कर जमा करने के लिए अधिकतम तीन किस्तों की सुविधा दी है। योजना लागू होने के 30 दिनों के भीतर करदाता को कुल बकाये की एक-तिहाई राशि जमा करनी होगी। इसके बाद बची हुई दो-तिहाई रकम अगले दो महीनों में दो मासिक किस्तों के जरिए जमा की जा सकेगी। इस तरह योजना के तहत बकाया राशि का पूरा भुगतान अधिकतम तीन महीने में करना होगा। इससे उन लोगों को राहत मिल सकती है, जो एक साथ पूरी बकाया राशि जमा करने में परेशानी महसूस कर रहे थे।
बढ़ेगी निकायों की आय, विकास कार्यों को मिलेगा फायदा
नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। OTS योजना से लंबे समय से अटके कर बकायों की वसूली आसान हो सकती है और निकायों की वित्तीय स्थिति में सुधार आएगा। सरकार के अनुसार, करों से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल शहरों में जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकेगा। इसमें सड़क, जल निकासी, पेयजल, स्वच्छता और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
पुराने विवादों के निपटारे की भी उम्मीद
सरकार का एक और उद्देश्य कर से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवादों को कम करना है। पुराने बकाये के आसान निस्तारण से करदाताओं और नगरीय निकायों के बीच विवादों की संख्या घटने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, योगी सरकार की OTS योजना का फोकस दो तरफ है—एक ओर पुराने संपत्ति कर बकायेदारों को भुगतान का आसान रास्ता देना और दूसरी ओर नगरीय निकायों की आय बढ़ाकर शहरों में विकास कार्यों के लिए ज्यादा संसाधन उपलब्ध कराना। अब देखना होगा कि 15 अगस्त से शुरू होने वाली यह योजना कितने करदाताओं को अपने बकाये का निपटारा करने के लिए प्रेरित करती है।
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