ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
गाजियाबाद से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर हर कोई दुखी हो गया। एक नेवी के रिटायर्ड हवलदार का शव रेलवे स्टेशन के पास गटर में पड़ा मिला। वो 7 दिन से लापता थे। परिवार वाले बेचैन होकर इधर-उधर ढूंढ रहे थे, लेकिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि आखिर इतना बुरा होगा। अजय कुमार नाम के इस शख्स ने देश की सेवा की, नेवी में हवलदार रैंक तक पहुंचे। रिटायरमेंट के बाद परिवार के साथ शांत जिंदगी जी रहे थे। लेकिन 2 जनवरी को घर से निकले और फिर लौटे ही नहीं।
ये खबर सिर्फ एक मौत की नहीं। ये उन
जांबाजों की कहानी है जो देश के लिए जान देते हैं, लेकिन आखिर में अपनी जिंदगी में छोटी-छोटी परेशानियों से जूझते हैं।
परिवार का दर्द सोचकर ही सीने में चुभ जाता है।
अजय कुमार कौन थे?
परिवार और जिंदगी
अजय कुमार धेदा गांव के रहने वाले थे।
उम्र करीब 45 साल। नेवी से हवलदार पद पर
रिटायर हुए। गाजियाबाद की DLF कॉलोनी में पत्नी और बेटी के
साथ रहते थे। 1 जनवरी को पिता राजकुमार के पास गांव आए। 2
जनवरी को बोले—मोबाइल का नया सिम लेने जा रहा हूं। घर से निकले,
लेकिन शाम तक नहीं लौटे। रात हुई, सुबह हुई,
फिर भी कोई खबर नहीं।
पिता राजकुमार ने 3
दिन बाद बहू को फोन किया। पूछा—अजय घर पहुंचा? बहू ने कहा—नहीं पापा जी। तब जाकर परिवार को लगा कि कुछ गड़बड़ है। सबने
मिलकर तलाश शुरू की। दोस्तों, रिश्तेदारों से पूछा। लेकिन
कहीं सुराग नहीं। आखिरकार मुरादनगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई। पुलिस ने
भी सर्चिंग शुरू की। लेकिन 7 दिन बीत गए, कोई अता-पता नहीं।
कल बृहस्पतिवार दोपहर को रेलवे स्टेशन
के पास गटर में शव दिखा। लोग इकट्ठे हो गए। पुलिस पहुंची,
शव बाहर निकाला। पहचान हुई तो परिवार का रो-रोकर बुरा हाल। पूरा
गांव सन्नाटे में डूब गया।
शव मिलने के बाद परिवार का बुरा हाल
सोचिए उस पिता का दर्द जिन्होंने बेटे
को खो दिया। राजकुमार ने बताया कि अजय हमेशा खुशमिजाज रहता था। नेवी में सेवा पूरी
की,
पेंशन पर आराम की जिंदगी। लेकिन ये अचानक गायब होना समझ नहीं आया।
बहू-बेटी गाजियाबाद में परेशान। बेटी छोटी है, उसका भविष्य
क्या होगा? पूरा परिवार कोहराम मचा हुआ है। पड़ोसी भी आंसू
पोंछ रहे हैं।
ऐसे वक्त में सवाल उठते हैं—क्या वजह
रही होगी?
मोबाइल सिम लेने जाना था, रास्ते में क्या हुआ?
गटर में कैसे पहुंचे? हादसा था या कुछ और?
पुलिस कह रही है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगा। लेकिन परिवार
को इंसाफ चाहिए।
पुलिस जांच: अभी कुछ साफ नहीं
मुरादनगर पुलिस ने शव कब्जे में लिया।
पोस्टमार्टम के लिए भेजा। ACP का बयान है कि मौत
का कारण रिपोर्ट आने पर पता चलेगा। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। CCTV फुटेज चेक हो रहे हैं। मोबाइल लोकेशन ट्रैक की जा रही है। गुमशुदगी की
रिपोर्ट पहले से थी, इसलिए पुराने बयान रिकॉर्ड कर रहे हैं।
गाजियाबाद में पहले भी नाले-नालियों
से शव मिलते रहे हैं। कभी हादसे, कभी झगड़े।
लेकिन नेवी बैकग्राउंड वाला केस संवेदनशील है। वरिष्ठ अधिकारी जांच में जुटे हैं।
आशा है जल्द सच सामने आएगा।
नेवी वेटरन्स की जिंदगी: सम्मान के
हकदार
देशभर में लाखों रिटायर्ड सैनिक,
नौसैनिक हैं। सेवा पूरी करते हैं, फिर सिविल
लाइफ में घुलमिल जाते हैं। लेकिन कई बार छोटी समस्याएं परेशान कर देती हैं। पेंशन
ठीक है, लेकिन फैमिली प्रेशर, स्वास्थ्य,
रोजगार। अजय जैसे लोग समाज का हिस्सा बन जाते हैं। उनकी सुरक्षा भी
जरूरी।
नेवी के जवान समंदर में दुश्मनों से
लड़ते हैं। रिटायरमेंट के बाद गांव-शहर में चैन की जिंदगी चाहिए। सरकार ने वेलफेयर
स्कीम्स शुरू की हैं—पेंशन, मेडिकल, आवास। लेकिन जागरूकता कम है। परिवारों को काउंसलिंग की जरूरत। अगर अजय पर
कोई टेंशन थी, तो किसी से बात कर लेते।
स्थानीय इलाके में सतर्कता बढ़ी
मुरादनगर रेलवे स्टेशन के आसपास अब
सतर्कता बरती जा रही है। गटर साफ-सफाई का काम तेज। लोग कह रहे हैं—कहीं और भी तो
नहीं फंसा कोई। धेदा गांव में माहौल गमगीन। मंदिरों में प्रार्थना हो रही है। अजय
के लिए शांति की कामना।
गाजियाबाद NCR
का हिस्सा है। यहां पलायन ज्यादा। लोग गांव-शहर के चक्कर लगाते हैं।
सिम कार्ड, छोटे कामों के लिए घूमते हैं। खतरा हमेशा रहता
है। ट्रैफिक, चोरी, झगड़े। लेकिन गटर
में शव मिलना सबसे डरावना।
समाज का फर्ज: वेटरन्स का सम्मान
ये घटना समाज को सोचने पर मजबूर करती
है। रिटायर्ड सैनिकों के लिए हेल्पलाइन होनी चाहिए। मेंटल हेल्थ चेकअप रेगुलर।
परिवार को सपोर्ट। अगर अजय ने पहले कोई बात शेयर की होती,
तो शायद बच जाते। अब जो हो गया, वो हो गया।
लेकिन सबक लेना जरूरी।
परिवार को मजबूत होना पड़ेगा। बेटी का
भविष्य संभालना पड़ेगा। नेवी के साथी मदद करेंगे। सरकार से पेंशन,
सहायता मांगें। इंसाफ की लड़ाई लड़ें।
आगे क्या होगा?
उम्मीद की किरण
पोस्टमार्टम रिपोर्ट 2-3
दिन में आएगी। अगर हादसा साबित हुआ तो केस बंद। लेकिन संदेह रहा तो
मर्डर एंगल जांचा जाएगा। परिवार न्याय मांगेगा। मीडिया कवरेज से दबाव बनेगा। आशा
है सच सामने आए।
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