ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन क्षेत्र में रहने वाले हर्षित भट्ट की नोएडा में एक दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। वह खुले पड़े गड्ढे में गिरकर डूब गया, जिससे उसकी जान चली गई। यह घटना पूरे इलाके में शोक और गुस्से का कारण बनी हुई है।
आखिरी शब्द जो बन गए याद
हर्षित के परिवार के अनुसार, घर से निकलने से पहले उसने अपनी छोटी बहन से कहा था कि वह लौटकर “इडली-सांभर” खाएगा। उसने मजाकिया अंदाज में कहा था कि वह वापस आकर खाना खाएगा और बहन से उसे बनाने को कहा था। लेकिन यह मासूम सा वादा अब परिवार के लिए सबसे दर्दनाक याद बन गया है।
आखिरी संपर्क और परीक्षा का दिन
बताया जा रहा है कि जिस दिन हादसा हुआ, उसी दिन हर्षित भट्ट का पेपर था। परीक्षा देने के बाद वह घर से बाहर गया, लेकिन फिर कभी वापस नहीं लौटा। उसने अपनी मां को मैसेज करके बताया था कि उसे घर आने में देर होगी। यह उसका आखिरी संपर्क था।
अचानक गायब हो गया बेटा
परिवार को किसी भी तरह का अंदाजा नहीं था कि यह सामान्य दिन उनकी जिंदगी का आखिरी सामान्य दिन साबित होगा। परिजन लगातार उससे संपर्क करने की कोशिश करते रहे, लेकिन बाद में जब खबर मिली तो पूरे परिवार में कोहराम मच गया।
परिवार में मातम, मां का रो-रोकर बुरा हाल
हादसे की खबर मिलते ही घर में मातम छा गया। मां लगातार रो-रोकर बेसुध हो रही हैं, जबकि पिता तुरंत लद्दाख से घर के लिए रवाना हुए। फ्लाइट में देरी के कारण उन्हें दिल्ली पहुंचने में समय लगा, लेकिन बाद में वे नोएडा पहुंचे और बेटे के अंतिम दर्शन किए।
अंतिम संस्कार में उमड़ा दर्द
हर्षित भट्ट का शव बाद में परिवार के घर लाया गया। इसके बाद भारी मन से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई और हिंडन श्मशान घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया गया।
प्रशासन पर उठे सवाल
इंदिरापुरम और आसपास के लोगों ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि अगर पहले हुए हादसों के बाद खुले गड्ढों को समय पर भर दिया जाता, तो यह दर्दनाक घटना रोकी जा सकती थी।
एक मासूम वादा जो हमेशा रह गया अधूरा
“इडली-सांभर बनाकर रखना, आकर खाऊंगा” — यह वाक्य अब सिर्फ एक याद नहीं, बल्कि परिवार के लिए ऐसा दर्द है जो कभी खत्म नहीं होगा। हर्षित भट्ट की यह कहानी हर किसी को झकझोर देती है और सड़क सुरक्षा व प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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