ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
आज जब कोई “पापों का शहर” कहता है, तो लोगों के दिमाग में सबसे पहले लास वेगास आता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि लास वेगास से सैकड़ों साल पहले भी एक शहर था, जो अपने समय में उससे भी ज्यादा बदनाम माना जाता था। उस शहर का नाम था पोर्ट रॉयल, जो आज के जमैका में स्थित था। इसकी कहानी सिर्फ ऐशो-आराम और अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक ऐसा मोड़ भी है जिसने इस शहर को इतिहास के सबसे चर्चित “डूबते शहरों” में शामिल कर दिया।
पोर्ट रॉयल का नाम अक्सर “wickedest city on Earth” जैसे टैग के साथ
लिया जाता है। कई लोगों ने इसे “New World का Sodom” तक कहा, यानी ऐसा शहर जहां गलत काम खुलेआम होते
थे। यही बदनामी इसकी पहचान बन गई, और फिर 1692 में एक भयानक प्राकृतिक आपदा ने इसे लगभग
खत्म ही कर दिया।
पोर्ट रॉयल कहां था और क्यों फेमस हुआ?
पोर्ट रॉयल जमैका के दक्षिणी किनारे पर एक प्राकृतिक बंदरगाह के पास
बसा हुआ था, और इसी वजह से यह ट्रेडिंग और जहाजों के लिहाज से बहुत अहम जगह बन
गया। 17वीं सदी
में यह इलाका तेजी से बढ़ा और कई लोग यहां काम, व्यापार और किस्मत आजमाने आए।
लेकिन इस शहर की “फेम” का एक बड़ा कारण इसका दूसरा चेहरा भी
था—समुद्री लुटेरे, निजी जहाजों से हमले करने वाले लोग (privateers) और ऐसे कई समूह,
जो लूट का माल लेकर
इसी बंदरगाह पर आते-जाते थे। समय के साथ यह जगह पाइरेट्स का बेस बन गई और शहर की
पहचान “खुली छूट” वाली जिंदगी से जुड़ती चली गई।
इसे “पापों का शहर” क्यों कहा गया?
इतिहास में पोर्ट रॉयल को बदनाम करने वाले कारणों में शराब, जुआ, वेश्यावृत्ति और
अपराध का खुला माहौल बताया जाता है। यही वजह है कि लोककथाओं और इतिहास में इसे
“सबसे बदनाम शहर” जैसी पहचान मिली। शहर की कमाई भी अक्सर ऐसे कामों और उस दौर के
समुद्री हमलों से आए माल से जुड़ी मानी जाती थी, इसलिए यहां पैसे की चमक और ऐश का माहौल
बहुत दिखता था।
धीरे-धीरे यह शहर “मौज-मस्ती” का पर्याय बन गया, जहां रातें लंबी और
नियम ढीले समझे जाते थे। यही इमेज बाद में इसके लिए भारी भी पड़ी, क्योंकि जब 1692
की आपदा आई तो लोगों
ने इसे “भगवान की सजा” जैसी बातों से जोड़कर भी देखा।
1692: जब शहर समुद्र में समा गया
पोर्ट रॉयल की कहानी का सबसे बड़ा और सबसे डरावना हिस्सा 1692 का भूकंप है। इस
भूकंप के बाद सुनामी भी आई और शहर का बड़ा हिस्सा समुद्र में चला गया। इतिहास में
यह दर्ज है कि उस आपदा में करीब 2,000 लोगों की मौत भूकंप और सुनामी के चलते हुई,
और इसके बाद के
दिनों में चोटों और बीमारी से भी बहुत लोगों की मौत हुई।
यह घटना इसलिए भी चौंकाती है क्योंकि पोर्ट रॉयल का बड़ा हिस्सा सचमुच
“डूब” गया, यानी वह जमीन ही समुद्र के नीचे चली गई जिस पर शहर बसा था। बाद के समय
में यह जगह “sunken city” के तौर पर भी जानी जाने लगी।
लोग इसे “चेतावनी” क्यों मानते हैं?
जब कोई शहर अपने बुरे नाम के लिए मशहूर हो और फिर अचानक इतनी बड़ी
तबाही झेल ले, तो कई समाजों में लोग उसे “नैतिक कहानी” की तरह देखने लगते हैं। पोर्ट
रॉयल के साथ भी यही हुआ—कुछ लोगों ने इसे पापों की सजा, चेतावनी, या भगवान का न्याय मानकर बयान किया।
हालांकि असल वजह प्राकृतिक आपदा थी, लेकिन “इमेज” की वजह से इस घटना ने एक अलग ही तरह
का प्रतीकात्मक रूप ले लिया।
यही कारण है कि पोर्ट रॉयल की कहानी आज भी सिर्फ इतिहास नहीं लगती,
बल्कि एक ऐसी कहानी
लगती है जो इंसान की लालच, मौज और लापरवाही—सब पर सवाल उठाती है। खासकर तब,
जब एक समृद्ध और
बदनाम शहर कुछ ही घंटों में बिखर जाता है।
पोर्ट रॉयल आज किस रूप में याद किया जाता है?
आज पोर्ट रॉयल को एक ऐतिहासिक जगह के तौर पर देखा जाता है, और इसके “डूबे हुए”
हिस्से ने इतिहासकारों और रिसर्च करने वालों की दिलचस्पी बढ़ाई है। इसके बारे में
जितनी बातें समुद्री लुटेरों की वजह से कही जाती हैं, उतनी ही बातें इसकी तबाही और उसके बाद के
बदलावों की वजह से भी होती हैं।
यही वजह है कि पोर्ट रॉयल को कई लोग “लास वेगास से पहले का पापों का
शहर” कहकर याद करते हैं—एक ऐसा शहर, जो अपने दौर में बहुत अमीर और बहुत बदनाम था,
और फिर एक दिन
इतिहास के नीचे दब गया, बल्कि कुछ हिस्सा समुद्र के नीचे भी चला गया।
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