ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने IPL सट्टेबाजी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। बुधवार, 22 अप्रैल को की गई इस कार्रवाई में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। इस ऑपरेशन के बाद शहर में चल रहे अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।
कैसे हुआ खुलासा?
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के अनुसार, शहर में IPL सट्टेबाजी को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद पुलिस ने विशेष टीम बनाकर जांच शुरू की। मंगलवार रात गोविंदपुरी पुल के पास पुलिस ने एक वाहन को रोका, जहां दो आरोपी मोबाइल फोन पर सट्टेबाजी करते पकड़े गए। पूछताछ के बाद पुलिस किदवई नगर के एक किराए के मकान तक पहुंची, जहां से तीन और लोगों को गिरफ्तार किया गया।
3.91 करोड़ रुपये और उपकरण बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस को 3.91 करोड़ रुपये नकद मिले। इसके अलावा तीन करेंसी गिनने की मशीनें, एक वेरिफिकेशन मशीन, कई मोबाइल फोन और सट्टेबाजी से जुड़े उपकरण भी बरामद किए गए। इतनी बड़ी रकम बरामद होने से साफ है कि यह रैकेट बड़े स्तर पर काम कर रहा था।
ऐप और वेबसाइट के जरिए चलता था नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी Bethub24 नाम की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए सट्टेबाजी का कारोबार चला रहे थे। वे “मास्टर आईडी” और सब-आईडी का नेटवर्क बनाकर लोगों को जोड़ते थे। सोशल मीडिया के जरिए लिंक भेजकर लोगों को ऐप डाउनलोड कराया जाता था और फिर उनसे सट्टा लगवाया जाता था। छोटी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर की जाती थी, जबकि बड़ी रकम कैश में दी जाती थी।
कौन हैं आरोपी?
गिरफ्तार किए गए लोगों में कार्तिक लखवानी और राजकुमार मुख्य संचालक बताए जा रहे हैं। वहीं गुजरात के कल्पेश, रवि नाई और विष्णु नकदी के लेन-देन का काम संभालते थे। इन कर्मचारियों को हर महीने 13,000 से 20,000 रुपये तक की सैलरी दी जाती थी। इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड मनीष उर्फ “प्रोफेसर” अभी फरार है। पुलिस के मुताबिक उसकी आखिरी लोकेशन पुणे में मिली है और उसे पकड़ने के लिए टीमें लगातार काम कर रही हैं।
सट्टेबाजों को ऐसे बनाते थे शिकार
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी बड़े सट्टेबाजों को नुकसान पहुंचाने के लिए मैच के नतीजों में हेरफेर करते थे। यह गिरोह खासतौर पर नए यूजर्स को लालच देकर जोड़ता था और फिर उन्हें धीरे-धीरे बड़े दांव लगाने के लिए प्रेरित करता था। पुलिस ने बरामद नकदी की जानकारी आयकर विभाग को दे दी है। आगे की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है। यह कार्रवाई दिखाती है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क कितना बड़ा और संगठित हो चुका है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
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