ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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रूस से भारत द्वारा कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने नई दिल्ली में राजनीतिक घमासान खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि भारत मूल रूप से उन्हें खुश करने की कोशिश कर रहा था और अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, तो अमेरिका भारत से होने वाले आयात पर उच्च शुल्क लगा सकता है। इस बयान के बाद भारत में कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने पीएम मोदी पर सवाल उठाए हैं।
खरगे का कटाक्ष: "मोगैम्बो खुश हुआ"
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्रंप के बयान का मजाकिया अंदाज में जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप मोदी को लेकर यही कहना चाह रहे हैं कि "मोगैम्बो खुश हुआ"—फिल्म मिस्टर इंडिया का प्रसिद्ध डायलॉग। खरगे ने कटाक्ष किया कि ऐसे डराने वाले रवैये से भारत झुकने वाला नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया, "लेकिन मोदी जी उनके सामने नाक क्यों रगड़ रहे हैं, मुझे मालूम नहीं है।"
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश की प्रतिक्रिया
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि व्हाइट हाउस में बैठे अमेरिकी राष्ट्रपति का रवैया “कभी गरम, कभी नरम” वाला है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, तो आयात पर अधिक शुल्क लगाया जा सकता है। रमेश ने कहा कि भारत ने अमेरिका के “नमस्ते ट्रंप” और “Howdy Modi” जैसे आयोजनों और सोशल मीडिया पोस्ट के बावजूद अपनी नीति नहीं बदली।
ट्रंप का बयान और अमेरिकी संसद का संदर्भ
रविवार को फ्लोरिडा से वॉशिंगटन डीसी जाते समय एयर फोर्स वन में ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं और उन्हें पता था कि ट्रंप खुश नहीं हैं, इसलिए वे खुश करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत उनकी बात नहीं मानता, तो अमेरिका जल्दी ही टैरिफ बढ़ा सकता है, जो भारत के लिए नुकसानदेह होगा।
ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के बयान के बाद आई। ग्राहम ने कहा कि ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के कारण भारत अब रूस से काफी कम तेल खरीद रहा है। उन्होंने अपने टैरिफ संबंधी विधेयक का जिक्र किया, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रावधान है।
भारत की प्रतिक्रिया और राजनीतिक बहस
भारत ने अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे अंतरराष्ट्रीय दबाव का उदाहरण बताया और मोदी सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भारत की विदेश नीति और व्यापारिक निर्णय स्वतंत्र होने चाहिए और किसी भी विदेशी धमकी या दबाव से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया विवाद खड़ा कर रहा है। राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और कटाक्षों ने इसे और भी सुर्खियों में ला दिया है। यह स्पष्ट है कि भारत अपने व्यापारिक और ऊर्जा सुरक्षा निर्णयों में स्वतंत्र रहने का पक्ष ले रहा है। इस विवाद ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत की विदेश नीति पर बहस का नया मोड़ दिया है।
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