ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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देश के कई रेलवे स्टेशनों की रेकी और जासूसी के बड़े खुलासे के बाद रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गई हैं। जांच में सामने आया है कि संदिग्ध लोग पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रहे थे और संवेदनशील स्थानों की जानकारी बाहर भेज रहे थे। इस मामले के सामने आने के बाद रेलवे ट्रैक, स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है।
21 संदिग्धों की गिरफ्तारी से खुला नेटवर्क
कौशांबी पुलिस ने 14 से 24 मार्च के बीच 21 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे कई रेलवे स्टेशनों की रेकी कर रहे थे और वहां की जानकारी पाकिस्तान भेज रहे थे। जांच में यह भी पता चला कि कुछ स्टेशनों पर गुप्त रूप से कैमरे लगाए गए थे, जिनकी लाइव फीड सीधे पाकिस्तान भेजी जा रही थी।
कैमरों से भेजी जा रही थी लाइव फीड
दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थानों पर लगाए गए कैमरों की लाइव फीड पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स देख रहे थे। आरोपियों ने 100 से ज्यादा संवेदनशील स्थानों के वीडियो और लोकेशन भी भेजे, जिससे सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा सतर्क हो गई हैं।
सुरक्षा व्यवस्था में मिली बड़ी खामियां
जांच के दौरान गाजियाबाद और साहिबाबाद रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा में गंभीर कमियां सामने आईं। इन स्टेशनों पर बॉडी स्कैनर और मेटल डिटेक्टर की कमी पाई गई। साथ ही, कई ऐसे खुले रास्ते भी मिले, जहां से कोई भी आसानी से अंदर-बाहर आ सकता था।
रेलवे ने उठाए सख्त कदम
घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। दिल्ली बॉर्डर से मुरादाबाद तक रेलवे ट्रैक को 10 जोन में बांटा गया है। हर जोन में पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा, मौजूदा 45 कैमरों के साथ जल्द ही 150 नए कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
जांच जारी, NIA को मिल सकता है केस
गिरफ्तार आरोपियों से 24 मोबाइल फोन, 10 सिम कार्ड और 2 सीसीटीवी कैमरे बरामद किए गए हैं। इनकी फोरेंसिक जांच जारी है, जिसकी रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है। फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपा जा सकता है। फिलहाल 11 सदस्यीय एसआईटी इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
रेलवे स्टेशनों की जासूसी का यह मामला देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से इस नेटवर्क का खुलासा हो गया है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है।
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