ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा स्नान के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। गाजियाबाद के दो लोगों की गंगा में डूबने से मौत हो गई, जिससे उनके परिवारों और सोसाइटी में शोक की लहर दौड़ गई है।
घूमने गए थे, हादसे का शिकार बने
मृतकों की पहचान 39 वर्षीय सचिन त्यागी और 43 वर्षीय बृजेश कुमार त्रिपाठी के रूप में हुई है। दोनों गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित क्वांटम होम्स सोसाइटी में रहते थे और एक ही टावर में पड़ोसी थे। जानकारी के मुताबिक, दोनों परिवार दो दिन पहले सचिन त्यागी की कार से हरिद्वार और ऋषिकेश घूमने गए थे। उन्हें रविवार को वापस लौटना था, लेकिन इससे पहले ही यह दुखद घटना हो गई।
गंगा स्नान के दौरान हुआ हादसा
रविवार सुबह दोनों गंगा में स्नान करने गए थे। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वे गहरे पानी में चले गए। गंगा का तेज बहाव उन्हें अपने साथ बहा ले गया और देखते ही देखते दोनों पानी में डूब गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन, लेकिन नहीं बच सकी जान
घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत शोर मचाया और पुलिस को सूचना दी गई। गोताखोरों की मदद से करीब सवा घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया। आखिरकार दोनों को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
घाट की स्थिति बनी हादसे की वजह
बताया जा रहा है कि जहां यह हादसा हुआ, वहां पहले पक्का घाट हुआ करता था। लेकिन अब वहां मिट्टी भर जाने के कारण पानी की गहराई का सही अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। इसी वजह से यह हादसा हुआ, जिससे एक बार फिर घाटों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
परिवार और सोसाइटी में शोक
सचिन त्यागी अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ रहते थे और बिल्डर का काम करते थे। वहीं बृजेश त्रिपाठी अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते थे और गुरुग्राम की एक कंपनी में नौकरी करते थे। दोनों परिवारों के साथ-साथ पूरी सोसाइटी में इस घटना के बाद गहरा शोक छाया हुआ है।
अंतिम संस्कार की तैयारी
सचिन त्यागी का शव गाजियाबाद पहुंच चुका है और उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है। वहीं बृजेश त्रिपाठी का शव भी उनके परिजन गाजियाबाद ला रहे हैं। यह घटना सभी के लिए एक बड़ा झटका है और इलाके में मातम का माहौल बना हुआ है।
यह हादसा एक बार फिर सावधानी बरतने की अहमियत को दर्शाता है। खासकर तेज बहाव वाली नदियों में स्नान करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है।प्रशासन को भी घाटों की सुरक्षा और व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
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