ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय यानी बाइलेटरल खेल संबंध फिलहाल सस्पेंड ही रहेंगे। खेल मंत्रालय ने बुधवार को इस संबंध में आधिकारिक मेमोरेंडम जारी करते हुए कहा कि भारत की खेल नीति देश की कूटनीतिक नीति के अनुसार ही चलेगी। इस फैसले के बाद अब भारतीय टीमें पाकिस्तान जाकर कोई बाइलेटरल सीरीज नहीं खेलेंगी और न ही पाकिस्तानी टीमों को भारत में द्विपक्षीय सीरीज खेलने की अनुमति दी जाएगी।
केवल मल्टीलेटरल टूर्नामेंट में होंगे मुकाबले
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले केवल ICC टूर्नामेंट, एशियन गेम्स, ओलिंपिक, वर्ल्ड कप और अन्य मल्टीलेटरल इवेंट्स में ही संभव होंगे। यानि दोनों देशों की टीमें अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में आमने-सामने आ सकती हैं, लेकिन अलग से कोई द्विपक्षीय सीरीज आयोजित नहीं की जाएगी।
खेल मंत्रालय ने जारी किया सर्कुलर
युवा मामले और खेल मंत्रालय ने यह निर्देश भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों को भेज दिया है। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के मामले में भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट और सख्त है। खेल से जुड़े सभी फैसले देश की विदेश नीति और सुरक्षा हितों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।
ऑपरेशन सिंदूर की बरसी के बीच आया फैसला
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब 7 मई को “ऑपरेशन सिंदूर” की पहली बरसी है। यह ऑपरेशन पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। उस आतंकी हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी, जिसके बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था।
क्रिकेट पर सबसे ज्यादा असर
इस फैसले का सबसे बड़ा असर क्रिकेट पर देखने को मिलेगा। भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी बाइलेटरल क्रिकेट सीरीज 2012-13 में खेली गई थी, जब पाकिस्तान की टीम भारत दौरे पर आई थी। इसके बाद दोनों देशों की टीमें केवल ICC टूर्नामेंट और एशिया कप जैसे आयोजनों में ही आमने-सामने आई हैं। हाल के समय में चैंपियंस ट्रॉफी 2025 को लेकर भी काफी चर्चा रही थी, लेकिन अब सरकार के रुख से साफ है कि भारत पाकिस्तान जाकर खेलने के पक्ष में नहीं है।
भारत बनना चाहता है बड़ा स्पोर्ट्स हब
सरकार ने साथ ही यह भी संकेत दिया है कि भारत खुद को बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए एक प्रमुख डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करना चाहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों, अधिकारियों और तकनीकी स्टाफ के लिए वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला किया गया है।
विदेशी अधिकारियों को मिलेगा विशेष वीजा
नई व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं के पदाधिकारियों को उनके कार्यकाल के दौरान पांच साल तक का प्रायोरिटी मल्टी-एंट्री वीजा दिया जाएगा। इसके अलावा भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों के प्रमुखों को विशेष प्रोटोकॉल और सम्मान भी दिया जाएगा।
भारत की खेल नीति और कूटनीति साथ-साथ
सरकार के इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि भारत खेल और कूटनीति को अलग-अलग नहीं देख रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति को प्राथमिकता देते हुए खेल संबंधों पर भी निर्णय लिए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भी भारत-पाकिस्तान के बीच खेल संबंधों में कोई बड़ा बदलाव फिलहाल मुश्किल दिखाई देता है।
भारत सरकार का यह फैसला स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय खेल संबंधों को लेकर उसका रुख अभी भी सख्त बना हुआ है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में दोनों देशों के बीच मुकाबले जारी रहेंगे, लेकिन बाइलेटरल सीरीज पर फिलहाल रोक बनी रहेगी।
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