ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
कल्पना कीजिए कि सुबह उठते ही आपका फोन पूरी तरह खामोश है। न व्हाट्सएप, न यूट्यूब, न ऑनलाइन बैंकिंग और न ही उबर-जियो या फ्रीलांसिंग काम। यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि एक ऐसी संभावना है जो आज की पूरी दुनिया को हिला सकती है।
इंटरनेट अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि रोजी-रोटी का आधार है
आज इंटरनेट वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। खासकर कोविड के बाद तो लाखों-करोड़ों लोगों ने ऑनलाइन काम शुरू कर दिया। फ्रीलांसर, यूट्यूबर, इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर, डिलीवरी बॉय, ऑनलाइन टीचर — सबकी कमाई इंटरनेट पर टिकी है। अगर यह एकदम बंद हो जाए तो स्थिति क्या होगी?
43 करोड़ गिग वर्कर्स का संकट
सबसे पहले सबसे बड़ा झटका उन लोगों को लगेगा जो गिग इकोनॉमी पर निर्भर हैं। दुनिया भर में करीब 40 से 43.5 करोड़ गिग वर्कर्स हैं। इनमें ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर, कंटेंट राइटर, स्विगी-जोमैटो डिलीवरी पार्टनर और उबर-ओला ड्राइवर शामिल हैं। इंटरनेट बंद होते ही इनकी पूरी दैनिक कमाई शून्य हो जाएगी। बैंक अकाउंट में पैसे आने बंद, ऑर्डर रुकेंगे और काम का कोई जरिया नहीं बचेगा।
अमेरिका और भारत पर सबसे भारी असर
अमेरिका में इंटरनेट आधारित गतिविधियां उसकी कुल अर्थव्यवस्था का 18 प्रतिशत हिस्सा हैं। यानी एक दिन में ही अरबों डॉलर का नुकसान। वहीं भारत में पूरा आईटी सेक्टर, ई-कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट (UPI, Paytm, PhonePe) और आउटसोर्सिंग काम ठप पड़ जाएगा। लाखों आईटी प्रोफेशनल्स, बीपीओ कर्मी और स्टार्टअप कर्मचारी बेरोजगार हो सकते हैं। छोटे-छोटे शहरों में जो युवा घर बैठे फ्रीलांसिंग कर रहे हैं, उनकी कमाई भी रुक जाएगी।
दूसरे क्षेत्रों पर क्या पड़ेगा असर?
1. बैंकिंग और पेमेंट: ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बंद, ATM काम करना मुश्किल।
2. ट्रांसपोर्ट: कैब बुकिंग, ट्रेन-फ्लाइट टिकटिंग प्रभावित।
3. एजुकेशन: ऑनलाइन क्लासेस, कोर्स और एग्जाम रुक जाएंगे।
4. मेडिकल और सरकारी काम: ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट सब ठप।
5. शेयर मार्केट: ट्रेडिंग रुकने से भारी नुकसान।
क्या कोई बच सकता है?कुछ पारंपरिक काम जैसे खेती, दुकानदारी और ऑफलाइन कारोबार थोड़े समय तक चल सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने पर सप्लाई चेन भी प्रभावित होगी। पूरी दुनिया में अफरा-तफरी और आर्थिक मंदी आ सकती है।यह लेख हमें याद दिलाता है कि हम कितना ज्यादा इंटरनेट पर निर्भर हो चुके हैं। इसलिए डिजिटल स्किल्स के साथ-साथ ऑफलाइन प्लान बी भी तैयार रखना चाहिए।
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