ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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देश की प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी एक बार फिर छात्र आंदोलन और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सुर्खियों में है। छात्रसंघ के चार शीर्ष पदाधिकारियों समेत पांच छात्रों को दो सेमेस्टर के लिए रस्टिकेट किए जाने के बाद कैंपस में तनाव का माहौल बन गया है। इस फैसले के विरोध में छात्रों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है और प्रशासन से आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
छात्रों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल
छात्रों का कहना है कि यह फैसला छात्र नेताओं को दबाने की कोशिश है। बुधवार को स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में हुई जनरल बॉडी मीटिंग में बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया। बैठक में लंबी चर्चा के बाद सामूहिक रूप से क्लास का बहिष्कार करने और हड़ताल पर जाने का फैसला लिया गया।
छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक रस्टिकेशन का आदेश वापस नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उनकी आवाज को दबाने के लिए सख्त कदम उठा रहा है, इसलिए विरोध करना जरूरी हो गया है।
फेस रिकग्निशन गेट बना विवाद की वजह
पूरा विवाद विश्वविद्यालय की डॉ. बी.आर. आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में लगाए गए फेस रिकग्निशन आधारित एंट्री सिस्टम से शुरू हुआ। यह तकनीक 21 नवंबर को लगाई गई थी। छात्रों ने शुरुआत से ही इस सिस्टम पर आपत्ति जताई थी और इसे निजता के खिलाफ बताया था।
प्रशासन का कहना है कि इस सिस्टम के विरोध के दौरान छात्रों ने प्रदर्शन किया, जिससे तोड़फोड़ और अव्यवस्था फैली। प्रशासन ने आरोप लगाया कि इस घटना से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। इन्हीं आरोपों के आधार पर छात्रसंघ के कई पदाधिकारियों और एक पूर्व छात्र नेता को वर्ष 2026 के विंटर और मॉनसून सेमेस्टर तक के लिए रस्टिकेट कर दिया गया।
छात्रों पर जुर्माना और कैंपस एंट्री पर रोक
रस्टिकेट किए गए छात्रों को कैंपस में प्रवेश करने से भी रोक दिया गया है। साथ ही उन पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य छात्रों पर भी करीब 19 हजार रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया गया है।
छात्रसंघ का कहना है कि यह कार्रवाई छात्र राजनीति को कमजोर करने की कोशिश है। उनका आरोप है कि जिन नेताओं को हटाया गया है, उनके कार्यकाल को प्रभावित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
क्लासरूम से सड़कों तक पहुंचा विरोध
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने क्लास का बहिष्कार किया और प्रशासन के खिलाफ मार्च निकाला। आंदोलन के दौरान छात्रों ने चीफ प्रॉक्टर मैनुअल की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया।
आंदोलन कर रहे छात्र रस्टिकेशन आदेश, जुर्माना, आउट ऑफ बाउंड्स आदेश और सीपीओ मैनुअल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। कैंपस में धरना और नारेबाजी लगातार जारी है।
शैक्षणिक गतिविधियों पर असर, समाधान अभी दूर
छात्रों के विरोध प्रदर्शन के चलते विश्वविद्यालय की पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
वहीं प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई नरमी के संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों पक्ष बातचीत से समाधान निकालते हैं या विवाद और ज्यादा बढ़ता है। फिलहाल विश्वविद्यालय में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और सभी की नजर इस बात पर है कि यह टकराव कब और कैसे खत्म होगा।
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