ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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फिल्मी दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, अंदर से उतनी ही दबाव वाली भी होती है। स्क्रीन पर परफेक्ट दिखने की उम्मीद, सोशल मीडिया का शोर और लोगों की टिप्पणियां—ये सब किसी भी इंसान को तोड़ सकती हैं। मृणाल ठाकुर ने हाल ही में अपने अनुभव के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि बॉडी शेमिंग और ट्रोलिंग की वजह से कई बार वह रोते-रोते सो जाती थीं और सुबह सूजी हुई आंखों के साथ उठती थीं।
“ये इसके लायक नहीं है” – खुद से लड़ाई
मृणाल ने माना कि पहले वह सुंदरता के तय मानकों में खुद को फिट करने की कोशिश करती थीं। यही कोशिश उन्हें अंदर से कमजोर करती गई। जब रोज कोई आपके शरीर, वजन या लुक पर टिप्पणी करे, तो आत्मविश्वास हिलना स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें खुद से कहना पड़ा कि यह सब “इसके लायक नहीं” है।
एक मुलाकात जिसने सोच बदल दी
उनकी कहानी में एक ऐसा मोड़ भी आया, जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। एक यंग फैन ने उनके शरीर की तारीफ की, और उसी पल मृणाल को एहसास हुआ कि वह खुद किसी और जैसी बॉडी चाह रही थीं। यानी जिस चीज़ को लोग पसंद कर रहे हैं, उसी को वह खुद में स्वीकार नहीं कर पा रही थीं। यही से उन्होंने खुद को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया।
अक्षय कुमार की सलाह, जो काम आई
मृणाल ने अक्षय कुमार की सलाह का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने कहा था—तुमने खुद के इस वर्जन को अपनाया, यह अच्छी बात है। अपने आसपास की उन आवाजों को मत सुनो जो ट्रिगर करती हैं या हजार बातें कहती हैं। साथ ही उन्होंने एक व्यावहारिक बात भी कही—अगर किसी रोल के लिए जरूरत हो तो वजन कम/ज्यादा किया जा सकता है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में खुद को नफरत की नजर से मत देखो। यह सलाह मृणाल के लिए एक तरह से बैलेंस बन गई—काम के लिए बदलाव अलग चीज़ है, और खुद को कमतर समझना अलग।
असली ताकत: सेल्फ-एक्सेप्टेंस
मृणाल ने कहा कि समय के साथ उन्होंने अपने नेचुरल कर्व्स को अपनाया और खुद की स्किन में कम्फर्टेबल होना सीखा। सपोर्टिव दोस्तों और पॉजिटिव सोच ने भी उन्हें मजबूत किया। यह एक जरूरी संदेश है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोज ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार होते हैं—लोग कुछ भी कह देंगे, लेकिन अपनी कीमत आपको खुद तय करनी है।
क्यों जरूरी है यह बातचीत?
क्योंकि बॉडी शेमिंग को अक्सर “मजाक” समझ लिया जाता है, जबकि इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा होता है। मृणाल की बात कई लोगों को यह भरोसा देती है कि टूटने के बाद भी खुद को संभाला जा सकता है—धीरे-धीरे, अपने तरीके से।
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