ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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सोशल मीडिया पर आजकल एक समस्या बहुत बढ़ गई है—किसी बड़े नाम से कोई भी “फर्जी बयान” जोड़ दो और पोस्ट वायरल कर दो। इसी बात पर शिखर धवन ने सख्त नाराजगी जताई है। धवन ने अपने नाम से चल रही कुछ पोस्ट्स को गलत बताया और लोगों से अपील की कि क्लिकबेट और झूठे बयानों के साथ उनके नाम का इस्तेमाल न करें।
मामला क्या है?
शिखर धवन की दूसरी शादी के बाद सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे पोस्ट वायरल होने लगे, जिनमें उनके नाम से पहली शादी को लेकर झूठी बातें लिखी गईं। कई लोग बिना जांचे-परखे उन्हें सच मानकर शेयर करने लगे। धवन को यह बात खटक गई, क्योंकि यह उनकी निजी जिंदगी और उनकी छवि दोनों को नुकसान पहुंचाती है।
धवन ने क्या कहा?
धवन ने साफ लिखा कि उन्होंने अपने अतीत का “बोझ” कभी साथ नहीं रखा—चाहे मैदान पर हो या मैदान के बाहर। उन्होंने कहा कि वे पॉजिटिविटी की ताकत में विश्वास रखते हैं और अपने अतीत का सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह उनके जीवन का नया अध्याय है और उन्हें फैंस, दोस्तों, परिवार, शुभचिंतकों और मीडिया से प्यार और आशीर्वाद मिला है, इसके लिए वे आभारी हैं।
“नया अध्याय” और “सम्मान” वाली बात क्यों अहम
धवन के शब्दों में एक बैलेंस दिखता है। उन्होंने किसी को गाली नहीं दी, न ही किसी पुराने रिश्ते पर टिप्पणी की। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि झूठे बयान जोड़ना गलत है। यह एक अच्छा तरीका है—सीधा मुद्दा पकड़ो, बिना विवाद बढ़ाए बात खत्म करो। इस तरह का बयान कई लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि वे शेयर करने से पहले एक बार रुककर सच जांचें।
गलत जानकारी का असर
फर्जी पोस्ट सिर्फ एक खिलाड़ी को नहीं, पूरे समाज को नुकसान पहुंचाती है। लोग बिना सबूत किसी की जिंदगी पर फैसला देने लगते हैं। खासकर सेलिब्रिटी के मामले में, एक झूठा कोट लाखों तक पहुंच जाता है। बाद में सच सामने आए भी, तो नुकसान हो चुका होता है। इसलिए धवन का यह गुस्सा जायज लगता है—क्योंकि यह उनकी पर्सनल स्पेस की बात है।
लोगों के लिए सीख
इस घटना से एक सीख साफ है: किसी भी वायरल पोस्ट पर आंख बंद करके भरोसा न करें। खासकर जब पोस्ट किसी के नाम से “कथित बयान” दिखा रही हो। अगर वह बयान सच है, तो वह व्यक्ति खुद भी कहीं न कहीं उसे कहेगा या लिखेगा। धवन की अपील यही है—प्यार और पॉजिटिविटी फैलाइए, और झूठे नैरेटिव का हिस्सा मत बनिए।
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